मानसिक प्रताड़ना के विरोध में जीसीएफ सुरक्षा कर्मियों ने सौंपा ज्ञापन, चार-चार घंटे की मनमानी शिफ्ट और अभद्र व्यवहार के खिलाफ पुलिस अधीक्षक से गुहार
जबलपुर। जीसीएफ संस्थान की सुरक्षा में तैनात भूतपूर्व सैनिक सुरक्षा कर्मियों ने मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को बड़ी संख्या में सुरक्षा कर्मी पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अपनी समस्याओं से अवगत कराते हुए निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग का ज्ञापन सौंपा। सुरक्षा कर्मियों ने बताया कि वे देश सेवा के बाद पूरी निष्ठा से संस्थान की सुरक्षा में जुटे हुए हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उनके साथ अनुचित व्यवहार किया जा रहा है। बिना किसी ठोस कारण के उनकी नियमित ड्यूटी के समय में बार-बार बदलाव किया जा रहा है, जिससे उनका दैनिक जीवन और कार्यक्षमता बुरी तरह प्रभावित हो रही है। अधिकारियों द्वारा अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता है, जिससे पूर्व सैनिकों का आत्मसम्मान आहत हो रहा है।
धक्का-मुक्की और दबाव का लगाया आरोप
भूतपूर्व सैनिकों का कहना है कि 14 सितंबर से अचानक उनकी कार्यप्रणाली में फेरबदल करते हुए 4-4 घंटे की टूटी हुई शिफ्ट लागू कर दी गई है। इस नई व्यवस्था के कारण उन्हें आराम करने का पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है और वे अत्यधिक शारीरिक तनाव से गुजर रहे हैं। जब सुरक्षा कर्मी अपनी इन व्यवहारिक परेशानियों को लेकर जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों के पास बातचीत करने पहुंचे, तो उनकी बात सुनने के बजाय उनके साथ धक्का-मुक्की की गई और नौकरी से निकालने की धमकियां दी गईं। समाजसेवी रामरतन यादव के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और पूर्व सैनिकों को सम्मानजनक कार्य वातावरण उपलब्ध कराया जाए। ज्ञापन सौंपने वालों में घनश्याम यादव, आकाश, अधिवक्ता अनुराग सिंह, नरेश चक्रवर्ती और प्रमोद सेन सहित कई सुरक्षा कर्मी शामिल रहे।
