जबलपुर। भोपाल में आंदोलनरत कनिष्ठ चिकित्सकों पर पुलिसिया रवैये के विरोध तथा मासिक भत्ते में इजाफे की मांग को लेकर जबलपुर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों ने बुधवार सुबह से बेमियादी कामबंद हड़ताल का आगाज कर दिया है। प्रदर्शनकारी चिकित्सकों ने ओपीडी कक्षों का पूर्ण बहिष्कार किया, जिसके चलते संभाग भर से पहुंचे सैकड़ों सामान्य व गंभीर मरीजों को पर्ची बनवाने से लेकर परामर्श तक भारी अव्यवस्था झेलनी पड़ी। आंदोलनकारियों का सीधा आरोप है कि कठिन परिस्थितियों में लगातार ड्यूटी देने के बावजूद शासन उनकी बुनियादी मांगों की उपेक्षा कर रहा है। राजधानी में साथी डॉक्टरों के साथ घटित दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम ने इस रोष को और भड़का दिया है, जिससे संपूर्ण विंध्य-महाकौशल अंचल की शासकीय स्वास्थ्य प्रणाली पर गहरा संकट मंडराने लगा है।
अड़ियल रुख से ओपीडी बंद और भत्ते का विवाद
चिकित्सालय परिसर में नारेबाजी कर रहे रेजीडेंट्स ने स्पष्ट किया कि प्रांतीय स्तर पर उन्हें वर्तमान में महज 14,300 रुपए का अल्प मासिक मानदेय प्रदान किया जा रहा है। बढ़ती महंगाई और लंबे कार्य घंटों की तुलना में यह राशि बेहद कम है। देश के अधिकांश पड़ोसी राज्यों ने अपने स्नातकोत्तर व इंटर्न चिकित्सकों के पारिश्रमिक ढांचे में व्यापक सुधार करते हुए इसे सम्मानजनक स्तर पर पहुंचा दिया है। इसी तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी इसे तत्काल संशोधित कर न्यूनतम 30,000 रुपए तय किया जाना चाहिए। वर्षों से लंबित इस फाइल पर प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस पहल न होने के कारण युवाओं में भारी हताशा व्याप्त है। कार्यस्थल पर सुरक्षा की गारंटी न मिलना भी असंतोष की एक बड़ी वजह बनकर उभरा है।
मांगें न मानीं तो बंद होंगी आपातकालीन सेवाएं
धरनारत चिकित्सकों ने दो टूक चेतावनी जारी की है कि यदि शासन स्तर से सार्थक वार्ता की पहल नहीं हुई तो गुरुवार से कैजुअल्टी, ट्रॉमा और आईसीयू जैसे संवेदनशील विभागों का संचालन भी पूरी तरह ठप कर दिया जाएगा। ऐसा होने पर वेंटिलेटर और एक्सीडेंटल वार्ड में भर्ती अति-गंभीर व्यक्तियों की जान पर बन आएगी। प्रबंधन अब तक वैकल्पिक व्यवस्था के तहत सीनियर कंसल्टेंट्स और प्राध्यापकों की ड्यूटी लगाकर हालात संभालने की कवायद में जुटा है, किंतु सीमित संसाधनों के कारण यह प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। गतिरोध लंबा खिंचने से ऑपरेशन थियेटरों में पूर्व निर्धारित शल्य क्रियाएं टलने की नौबत आ गई है। प्रशासन को समय रहते मध्यस्थता कर दोनों बिंदुओं पर सम्मानजनक हल निकालना होगा, अन्यथा विकट मानवीय त्रासदी उत्पन्न हो सकती है।
