नई दिल्ली. भारतीय रेलवे में अब ट्रेनिंग (प्रशिक्षण) में असफल होने पर भी सेवा समाप्त नहीं होगी। अनुकंपा के आधार पर मिली नौकरी चलती रहेगी। रेलवे बोर्ड ने अनुकंपा की नियुक्तियों पर स्थिति स्पष्ट कर दी है। अब यदि कोई कर्मचारी नियुक्ति के बाद निर्धारित आवश्यक ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी नहीं कर पाता है, तो उसकी सेवा सीधे समाप्त करने की बजाय उसे वैकल्पिक पद देने पर विचार किया जा सकता है।
रेलवे बोर्ड ने 31 अगस्त, 2026 को जारी पत्र में सभी भारतीय रेलवे और प्रोडक्शन यूनिट के जनरल मैनेजर को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिया है। बोर्ड निदेशक यूके तिवारी के अनुसार अनुकंपा के आधार पर नियुक्त कर्मचारी यदि अपने पद के लिए निर्धारित आवश्यक ट्रेनिंग पूरी नहीं कर पाता है, तो उसे डायरेक्ट रिक्रूट्स पर लागू मास्टर सर्कुलर के प्रविधानों के तहत निर्धारित ट्रेनिंग पूरी करने का विकल्प दिया जा सकता है।
इसका मतलब है कि कर्मचारी को सीधे सेवा समाप्ति की कार्रवाई का सामना करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत ट्रेनिंग पूरी करने का अवसर दिया जा सकता है। यदि कर्मचारी दोबारा भी ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी करने में असमर्थ रहता है अथवा वह दिए गए विकल्प का लाभ उठाना नहीं चाहता, तो भी उसकी सेवा समाप्त करना अनिवार्य नहीं होगा। ऐसे मामले में रेलवे उपयुक्त वैकल्पिक पद पर नियुक्ति देने पर विचार कर सकता है। जरूरत पडऩे पर यह पद निचले लेवल का भी हो सकता है।
हालांकि, वैकल्पिक पद के लिए कर्मचारी के पास संबंधित निर्धारित शैक्षिक योग्यता और मेडिकल फिटनेस होना आवश्यक होगा। साथ ही, उसे उस पद के लिए उपयुक्त पाया जाना भी जरूरी होगा। रेलवे बोर्ड का यह स्पष्टीकरण उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन्हें परिवार के आश्रित सदस्य के रूप में अनुकंपा के आधार पर रेलवे में नियुक्ति मिलती है, लेकिन बाद में नियुक्त पद से संबंधित अनिवार्य ट्रेनिंग पूरी करने में कठिनाई आती है।
बोर्ड ने अपने निर्णय में सेवा समाप्ति के बजाय वैकल्पिक रोजगार का रास्ता खुला रखने की व्यवस्था स्पष्ट की है। इससे ऐसे कर्मचारियों को राहत मिलने की संभावना है, जो ट्रेनिंग संबंधी शर्त पूरी नहीं कर पाने के कारण नौकरी गंवाने की स्थिति में पहुंच जाते थे। आल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन (एआइआरएफ) ने बोर्ड के इस निर्णय का स्वागत किया है। एआइआरएफ के जनरल सेक्रेटरी शिव गोपाल मिश्रा ने इस प्रकरण को बोर्ड के समक्ष उठाया था। फेडरेशन के संघर्षों के चलते अनुकंपा पर नियुक्त कर्मचारियों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकी है।
