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दिल्ली में केंद्रीय राज्यमंत्री से मिला मध्य प्रदेश उद्योग संगठन



जबलपुर। फेडरेशन ऑफ मध्य प्रदेश चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली के श्रम शक्ति भवन में केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री शोभा करंदलाजे से महत्वपूर्ण मुलाकात की। इस उच्चस्तरीय वार्ता में प्रदेश के भीतर औद्योगिक विस्तार, रोजगार निर्माण और पूंजी प्रवाह से जुड़ी कार्ययोजना पेश की गई। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व फेडरेशन अध्यक्ष हिमांशु खरे ने किया, जिनके साथ उपाध्यक्ष जयदेव ताम्रकर और सचिव प्रवीण आचार्य भी उपस्थित रहे। संगठन ने राज्य में व्यापार सुगमता बढ़ाने, नीतिगत सुधार लागू करने और विकसित भारत उद्योग व्यापार सम्मेलन में केंद्रीय राज्यमंत्री की गरिमामयी उपस्थिति सुनिश्चित करने का न्योता दिया। यह बैठक प्रांतीय स्तर पर लघु इकाइयों के आधुनिकीकरण और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से संपन्न हुई।

​नियम सरल होने से उद्योगों को रफ्तार मिलेगी

​मध्य प्रदेश का मौजूदा औद्योगिक वातावरण छोटे और मझोले उद्यमों के सर्वांगीण विस्तार के लिए बेहद अनुकूल है। राज्य की भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक संसाधन नए प्रोजेक्ट लगाने के लिए सबसे उपयुक्त अवसर उपलब्ध कराते हैं। जब प्रशासनिक स्तर पर वैधानिक स्वीकृतियां, उद्योग पंजीयन और लाइसेंस नवीनीकरण की व्यवस्था पारदर्शी होती है, तब उद्यमी बिना किसी रुकावट के अपने काम पर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं। जटिल कानूनी औपचारिकताओं को समाप्त कर समयबद्ध ऑनलाइन एकल खिड़की प्रणाली लागू करने से कारोबारियों का विश्वास बढ़ता है। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए रास्ते खुलते हैं, बल्कि ग्रामीण तथा अर्ध-शहरी इलाकों में आर्थिक गतिविधियां भी तेज गति पकड़ती हैं। पूंजी निवेश को आकर्षित करने के लिए स्पष्ट और व्यवहारिक नीतियों का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन सर्वाधिक महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

​तकनीक और वित्तीय सहायता से व्यापार बढ़ेगा

​प्रतिस्पर्धा के इस दौर में स्थानीय इकाइयों को वैश्विक स्तर पर टिके रहने के लिए आधुनिक तकनीकी संसाधन, रियायती बैंक ऋण तथा बड़े बाजारों तक सीधी पहुंच मिलनी चाहिए। छोटे कारखानों को कच्चे माल की आसान उपलब्धता और तैयार उत्पादों के विपणन में यदि केंद्र सरकार का संस्थागत सहयोग प्राप्त होता है, तो उनकी उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ जाती है। क्लस्टर आधारित संरचना और कौशल विकास प्रशिक्षण से कारखानों में कार्यकुशलता बढ़ती है। जब पुरानी इकाइयों को अपग्रेड करने का अवसर मिलता है और नए स्टार्टअप्स को शुरुआती प्रोत्साहन प्राप्त होता है, तो पूरा सेक्टर आत्मनिर्भर बनता है। केंद्र एवं राज्य के समन्वित प्रयासों से तैयार होने वाला यह सुदृढ़ तंत्र भविष्य में प्रदेश को देश का प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग केंद्र बनाने में सबसे अहम कड़ी सिद्ध होगा।

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