जबलपुर। रानीताल इलाके में स्थित बीएसएनएल टेलीग्राफ फैक्ट्री में घटित दर्दनाक हादसे ने 2 बेकसूर मजदूरों की जान ले ली, जबकि प्रशासन ने आनन-फानन में परिसर सील कर जांच बैठा दी है। मूसलाधार बारिश के दौरान जर्जर ढांचे में 10 अन्य साथियों संग काम कर रहे पश्चिम बंगाल के अब्दुल वशीर और स्थानीय निवासी मोहम्मद अकबर भारी दीवार गिरने से मलबे में दबकर अकाल मौत का शिकार हो गए। हादसे के तुरंत बाद मदनमहल थाना पुलिस ने मौके से फोन बंद कर भागे पेटी ठेकेदार अब्दुल बशीर की तलाश में छापेमारी शुरू कर दी है। यह पूरा मामला टेंडर नियमों को ताक पर रखकर इंसानी जान जोखिम में डालने का है, जहां मुनाफे की भूख ने 2 घरों के चिराग बुझा दिए।
शेड हटाने के नाम पर तुड़वाई जर्जर दीवारें
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार 3 माह पहले जयपुर की एएस कंपनी को 1.40 करोड़ रुपए में फैक्ट्री शेड हटाने का कार्य आवंटित हुआ था। मुख्य फर्म ने अनुबंध के विपरीत यह जिम्मा आगे पेटी ठेकेदार को थमा दिया। मूल समझौते के तहत केवल कबाड़ और शेड हटाना तय था, मगर अतिरिक्त कमाई के लालच में मजदूरों से फर्श की टाइलें उखड़वाई जा रही थीं और पुरानी दीवारें गिराई जा रही थीं। बिना किसी सुरक्षा साधन के कमजोर ढांचा ढहाने की इस मनमानी ने कामगारों को सीधे मौत के साए में खड़ा कर दिया।
उजड़ गया भरा-पूरा परिवार, अब इंसाफ की दरकार
हादसे के बाद भविष्य निधि संगठन की जांच में सामने आया कि निर्माण स्थल पर कार्यरत किसी भी मजदूर का पीएफ जमा नहीं हो रहा था और उन्हें बुनियादी श्रम अधिकारों से वंचित रखा गया था। इस आपदा ने मृतक अकबर के परिवार पर गहरा संकट खड़ा कर दिया है, क्योंकि वे घर के एकमात्र कमाऊ व्यक्ति थे। अपने पीछे वे पत्नी नीला बानो, 2 बेटों मोहम्मद अशरफ व अमान अंसारी और 1 बेटी अनादिया बानो को बिलखता छोड़ गए हैं। दोनों दिवंगत श्रमिक संबल योजना में पंजीकृत हैं, जिसके अंतर्गत सरकारी सहायता दी जाएगी। वहीं स्थानीय लोग ठेका फर्म की संपत्ति कुर्क कर दोनों पीड़ित परिवारों को 1-1 करोड़ रुपए का मुआवजा देने की मांग उठा रहे हैं।
