जबलपुर। जबलपुर में मेडिकल व नर्सिंग शिक्षा की रक्षा, कथित भ्रष्टाचार के खात्मे और आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के विखंडन की कोशिशों पर रोक लगाने हेतु एनएसओ छात्र संगठन का अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन लगातार जारी है। इस मोर्चे पर संस्थापक गोपाल पाराशर, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दीपक सिंह, प्रदेश अध्यक्ष सुभाष कुशवाहा, आदित्य तथा पिंटू के नेतृत्व में विद्यार्थियों ने व्यवस्था सुधार की मांग उठाई। प्रदर्शन स्थल पर सुरभि, कल्पना, काजल, नेहा, पूनम, सुमित, जतिन, धर्मेंद्र और राजू सहित कई छात्र मौजूद रहे। आंदोलनकारियों ने प्रदेश में वर्षों से अटके सत्रों को तुरंत पटरी पर लाने, संस्था को जबलपुर से अन्यत्र स्थानांतरित करने की सुगबुगाहट रोकने तथा भोपाल नर्सिंग काउंसिल की कार्यप्रणाली की पारदर्शी जांच कराकर जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त एक्शन लेने की मांग को प्रमुखता से सामने रखा।
महाकोशल के उच्च शिक्षण संस्थान पर गहराया संकट
संगठन के अनुसार करीब 15 साल पहले स्थापित हुए इस विश्वविद्यालय में अब तक स्थाई स्तर पर पर्याप्त अधिकारी और कर्मचारी नहीं रखे गए हैं। स्टाफ की इसी कमी के कारण छात्रों की समय पर परीक्षाएं आयोजित करने, नतीजों के समयबद्ध ऐलान और मूल डिग्री वितरण जैसे बुनियादी काम पूरी तरह पटरी से उतर चुके हैं। मान्यता से जुड़े विवादों और अदालती मुकदमों की मार सीधे पढ़ने वाले युवाओं के भविष्य पर पड़ रही है, जिसके चलते राज्यभर में नर्सिंग के शैक्षणिक सत्र 6 साल तक की भारी देरी से चल रहे हैं।
कालेजों की संबद्धता छिनने से स्थानीय रोजगार प्रभावित
धरने पर वक्ताओं ने तीखी आपत्ति जताई कि जबलपुर में मुख्य विश्वविद्यालय होने के बाद भी नर्सिंग व पैरामेडिकल कालेजों को जबरन क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों से जोड़ा जा रहा है। इस बिखराव को रोकते हुए सभी संस्थाओं को वापस इसी विश्वविद्यालय से संबद्ध करने की जरूरत है। इस केंद्र के सुचारू संचालन से केवल अध्ययन ही नहीं, बल्कि शहर के होटल, खानपान और बस-ऑटो परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों की रोजी-रोटी भी चलती है। पदाधिकारियों ने चेताया कि अगर व्यवस्थाएं नहीं सुधरीं तो संघर्ष और आक्रामक रूप लेगा।
