बताया गया है कि डॉ. राजेंद्र सिंह कुशराम कॉलेज में सहायक प्राध्यापक हैं, इसके अलावा वे एनसीसी प्रभारी भी थे। आरोप है कि एनसीसी में सीट खाली नहीं होने के बावजूद एडमिशन दिलाने के लिए उन्होंने छात्रा को मोबाइल पर मैसेज भेजकर शारीरिक संबंध बनाने की मांग की। पीडि़ता ने बैहर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। उसने आरोपी के भेजे मैसेज, वॉइस रिकॉर्डिंग और अन्य सबूत पुलिस को सौंपे। अभियोजन की ओर से पैरवी करने वाले वकील नारायण धुर्वे ने बताया कि एडमिशन कराने के बदले अनैतिक कार्य करने के लिए मोबाइल पर मैसेज भेजकर शारीरिक संबंध बनाने की मांग की गई थी। उनके मुताबिक, पुलिस ने पीडि़ता से मिले साक्ष्यों और वॉइस रिकॉर्डिंग की जांच की। इसके बाद आरोपी के खिलाफ यौन उत्पीडऩ का केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया गया।
बोला, नाम जोड़ दूं तो क्या करोगी-
पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी प्रोफसर एनसीसी में छात्राओं के नाम जोडऩे की बात करता था। वह कहता था- 'यदि मैं तुम्हारा नाम जोड़ दूं तो तुम क्या करोगी। इसके अलावा वह पार्टी के लिए भी रुक जाने की बात कहता था।
पहले एक छात्रा ने शिकायत की, जांच में 3 और सामने आईं-
मामले में शुरुआत में एक छात्रा ने शिकायत की थी। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। जांच के दौरान तीन और छात्राओं ने आरोपी के खिलाफ इसी तरह की शिकायत की। इस तरह अब तक 4 छात्राओं की शिकायत सामने आ चुकी है।
कोर्ट ने खारिज की जमानत, जेल भेजने के आदेश-
पुलिस ने आरोपी प्रोफेसर को गिरफ्तार करने के बाद कोर्ट में पेश किया। सहायक जिला अभियोजन अधिकारी नारायण धुर्वे के मुताबिक, आरोपी की ओर से न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी शिवानी असाटी की कोर्ट में जमानत याचिका लगाई गई थी। अदालत ने इसे खारिज कर दिया और आरोपी को जेल भेज दिया।
उच्च शिक्षा विभाग ने सस्पेंड कर जबलपुर अटैच किया-
मामला सामने आने के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने भी कार्रवाई की। शनिवार को विभाग के उपसचिव एल.के. खरे ने डॉ. राजेंद्र सिंह कुशराम के निलंबन का आदेश जारी किया। निलंबन की अवधि में उनका मुख्यालय क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा कार्यालय, जबलपुर तय किया गया है। मामले की पुलिस जांच जारी है।