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स्टेट बार चुनाव:जो कई बार अध्यक्ष रहे, वो भी हुए रेस से आउट!


जबलपुर
। मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल के चुनाव में 17वें दिन बड़ा उलटफेर सामने आया जब 5 बार अध्यक्ष रहे दिग्गज अधिवक्ता रामेश्वर नीखरा गाडरवारा एलिमिनेशन राउंड में रेस से बाहर हो गए। मुख्य चुनाव अधिकारी रिटायर्ड जस्टिस एसके पालो ने आधिकारिक जानकारी साझा करते हुए बताया कि मतों की छंटनी के इस चरण में रामेश्वर नीखरा के साथ सतना के हरीश कुमार द्विवेदी भी बाहर हुए हैं। वरीयता मतों के लगातार हस्तांतरण के चलते तय कोटा हासिल करने में विफल रहने पर दोनों दावेदारों की उम्मीदवारी समाप्त हुई। इस प्रक्रिया के साथ ही चुनावी मैदान से बाहर होने वाले कुल उम्मीदवारों की संख्या बढ़कर अब 86 पहुंच गई है।

अधिवक्ताओं के मतदान ने बदली बार की पूरी सियासत

​राज्य की विधिक राजनीति में दशकों तक दबदबा कायम रखने वाले वरिष्ठ नेतृत्व को मिले इस झटके ने पूरी चुनावी तस्वीर को नया मोड़ दे दिया है। वकीलों के बीच इस अप्रत्याशित परिणाम को एक गहरे संरचनात्मक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। मतों के ध्रुवीकरण और नए अधिवक्ताओं की प्राथमिकताओं ने पुराने राजनीतिक समीकरणों को ध्वस्त कर दिया। मतपेटियों से निकले रुझान साफ संकेत दे रहे हैं कि कानूनी बिरादरी ने इस बार पारंपरिक चेहरों के बजाय नई ऊर्जा और कार्यशैली को तरजीह दी है।

चुनावी इतिहास में दर्ज रहा शानदार सफर भी थमा

​काउंसिल के चुनावी रिकॉर्ड बताते हैं कि रामेश्वर नीखरा वर्ष 1979 में पहली बार मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल के सदस्य निर्वाचित हुए थे। इसके बाद उन्होंने अपनी मजबूत संगठनात्मक पकड़ के दम पर लगातार 9 बार सदस्य पद जीतकर इतिहास रचा था। संस्था के पूरे कार्यकाल में वे इकलौते ऐसे शख्स रहे जिन्होंने 5 बार चेयरमैन पद की कमान संभाली। चार दशकों से अधिक समय तक लगातार जीत दर्ज करने वाले सबसे अनुभवी चेहरे की इस विदाई ने साबित कर दिया है कि स्टेट बार के मतदाता अब पूरी तरह नई दिशा की ओर कदम बढ़ा चुके हैं।

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