भोपाल. मध्यप्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है. बीते दो दिन से लगातार हो रही बारिश से कई जिलों में नदी-नाले उफान पर हैं और निचले इलाकों में पानी भरने से हालात बिगडऩे लगे हैं. मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों में प्रदेश के 28 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है.
वहीं सबसे ज्यादा चिंता उन इलाकों को लेकर है, जहां तेज बारिश के साथ अचानक बाढ़ का खतरा भी बढ़ गया है. चित्रकूट में मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि मंडला क्षेत्र में नर्मदा का जलस्तर तेजी से बढ़ा है. इधर छतरपुर, पन्ना और मैहर में भी बारिश का असर ज्यादा है और बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं.
इन जिलों में अति भारी बारिश का खतरा
मौसम विभाग ने शुक्रवार (4 सितम्बर) के लिए राजगढ़, नर्मदापुरम, गुना, शिवपुरी, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. इन जिलों में कुछ स्थानों पर बहुत तेज बारिश होने की आशंका है. वहीं, लगातार बारिश की स्थिति में निचले इलाकों, नदी-नालों के आसपास और जलभराव वाले क्षेत्रों में लोगों की परेशानी बढ़ सकती है. इसके अलावा भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, बैतूल, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर, मंदसौर, अशोकनगर, ग्वालियर, दतिया, भिंड, श्योपुर, रीवा, सतना, छिंदवाड़ा और पन्ना में भी भारी बारिश की चेतावनी है. मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में 3 से 5 सितंबर के बीच भारी से अति भारी बारिश का दौर बने रहने की संभावना है.
इन जिलों में अचानक बाढ़ का खतरा
मध्यप्रदेश में बारिश के साथ सबसे बड़ी चिंता अचानक बाढ़ को लेकर है. पूर्वी मध्यप्रदेश के दमोह, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, नरसिंहपुर, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, सिवनी, छिंदवाड़ा और टीकमगढ़ में अचानक जलस्तर बढऩे की आशंका है. वहीं, पश्चिमी हिस्से में अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, सीहोर और बैतूल को भी संवेदनशील माना गया है.
नर्मदा उफान पर, बांधों से छोड़ा जा रहा पानी
लगातार बारिश की वजह से चित्रकूट में मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. मंडला में नर्मदा का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा है. इधर छतरपुर, पन्ना और मैहर के कुछ हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात बनने की सूचना है. ऐसे में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए छतरपुर के कुटनी बांध और जबलपुर के बरगी बांध से पानी छोड़ा जा रहा है. बांधों से पानी छोड़े जाने की स्थिति में डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में नदी का जलस्तर और बढ़ सकता है, इसलिए प्रशासन की ओर से निचले इलाकों में निगरानी जरूरी हो गई है.
निम्न दबाव क्षेत्र ने बढ़ाई बारिश
मौसम वैज्ञानिक के अनुसार, ऐसी बारिश के पीछे पूर्वोत्तर मध्यप्रदेश और आसपास बना चिह्नित निम्न दबाव क्षेत्र प्रमुख वजह है. इसके प्रभाव से राज्य में बारिश की गतिविधियां तेज हुई हैं. मध्यप्रदेश में 3 से 5 सितंबर के बीच भारी से अति भारी बारिश की संभावना है. पूर्वी हिस्सों में कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश की भी संभावना है. ऐसे में अगले 24 से 48 घंटे इसलिए अहम हैं. तेज बारिश के साथ तेज हवा, गरज-चमक और स्थानीय स्तर पर जलभराव की स्थिति बन सकती है.
