जबलपुर। अधारताल तिराहा के पास स्थित गोल्डन ब्रायलर चिकन सेंटर को लेकर इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है। अधारताल थाने से महज 500 मीटर की दूरी पर मौजूद इस दुकान में एक बड़े वाहन से कथित रूप से मृत मुर्गों को उतारकर बेचने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। हालांकि इस वीडियो और लगाए गए दावों की अभी तक कोई स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। इस पूरे मामले के सामने आते ही हिंदू धर्म सेना के नेता मुकेश रजक ने जनस्वास्थ्य तथा खाद्य सुरक्षा मानकों का हवाला देते हुए निष्पक्ष पड़ताल की मांग उठाई है। दूसरी तरफ इस संवेदनशील विषय पर स्थानीय अधारताल थाना पुलिस ने भी सच्चाई सामने लाने के लिए आवश्यक वैधानिक जांच प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।
खाद्य सुरक्षा विभाग से गहन निरीक्षण की मांग
नागरिकों की सेहत से जुड़े इस गंभीर प्रकरण में अब खाद्य सुरक्षा प्रशासन की सक्रिय भूमिका अपेक्षित मानी जा रही है। जानकारों के अनुसार सच तभी स्पष्ट हो सकेगा जब विशेषज्ञ टीम मौके पर पहुंचकर दुकान में रखे मांस की शुद्धता, भंडारण की व्यवस्था और आवक के स्रोतों का भौतिक सत्यापन करे। यदि वीडियो में दिख रहे दृश्य सही पाए जाते हैं तो दोषियों पर सख्त दंडात्मक कदम उठाने की जरूरत है। किसी भी व्यावसायिक प्रतिष्ठान द्वारा बासी अथवा अमानक मांसाहार की आपूर्ति सीधे तौर पर उपभोक्ताओं के जीवन के साथ खिलवाड़ है। इसलिए प्रशासनिक स्तर पर नमूने एकत्र कर प्रयोगशाला जांच कराना बेहद जरूरी बन गया है ताकि स्थिति पूरी तरह साफ हो सके।
परिवहन के उद्देश्य की तकनीकी जांच भी जरूरी
सड़क पर खड़े लोडिंग वाहन में भरे पक्षियों की वास्तविक दशा केवल कुछ सेकंड के क्लिप से पूरी तरह तय नहीं की जा सकती। आपूर्ति के समय परिंदों की स्थिति क्या थी, उन्हें किस फार्म से लाया गया था और गंतव्य पर किस प्रयोजन से उतारा जा रहा था, यह सब गहन विवेचना का मुख्य बिंदु है। किसी नतीजे पर पहुंचने से पूर्व तकनीकी पहलुओं और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों को दर्ज किया जाना न्यायसंगत होगा। क्षेत्रीय शांति और व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ भ्रामक दावों से बचने के लिए पारदर्शी अनुसंधान ही एकमात्र उचित समाधान है, जिससे आम जनता का विश्वास बना रहे।
