जबलपुर। जबलपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित शासकीय आईटीआई को अब निजी हाथों में सौंपने की तैयारी शुरू हो गई है और इसकी प्रक्रिया कई जगहों पर आरंभ भी हो चुकी है। जानकारों ने बताया कि यह ऐसा होने से अगर निजी हाथों में जाएगी तो बड़ी परेशानी हो जाएगी क्योंकि इसके बाद संस्थानों की व्यवस्था बदल जाएगी। इस दौरान 80 से 90 के दशक तक इन संस्थानों से पढ़ने वाले युवाओं को रेलवे और रक्षा क्षेत्रों में आसानी से नौकरियां मिलती थीं। लेकिन अब निजीकरण के चलते हालात पूरी तरह बदल रहे हैं। कंपनियां इन पर कब्जा करके अपनी मर्जी से फीस वसूलेंगी। इससे गरीब परिवारों के बच्चों के लिए प्रवेश पाना असंभव हो जाएगा। परिणामस्वरूप बेरोजगारी बढ़ेगी और आम जनमानस के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा जो बेहद चिंताजनक विषय है।
निजी हाथों में जाते ही बढ़ेगा शुल्क संकट
शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों की बागडोर अब प्राइवेट कंपनियों के हाथों में सौंपने की प्रक्रिया तेजी पकड़ चुकी है। इस बदलाव से मुख्य रूप से उन ट्रेडों पर बड़ा असर पड़ेगा जिनकी मांग बाजार में सबसे अधिक बनी रहती है। इनमें इलेक्ट्रिकल, फिटर, डीजल मैकेनिक, मोटर मैकेनिक, मशीनिस्ट, टर्नर, इलेक्ट्रॉनिक्स, शॉर्ट हैंड, वेल्डर, प्लंबर, शीट मेटल और कंप्यूटर साइंस जैसे महत्वपूर्ण ट्रेड शामिल हैं। इन सभी क्षेत्रों में प्रशिक्षण पाने वाले युवाओं को भविष्य में रोजगार मिलने के अवसर सबसे ज्यादा रहते हैं। जब इन महत्वपूर्ण ट्रेडों की कमान औद्योगिक घरानों या निजी संस्थाओं के पास चली जाएगी, तब इनकी नीलामी जैसी स्थिति बन जाएगी। कंपनियों द्वारा भारी भरकम फीस वसूले जाने से साधनहीन और गरीब पृष्ठभूमि के युवाओं का इन संस्थानों में प्रवेश पाना एक सपना बनकर रह जाएगा। केवल वही लोग अपने बच्चों को पढ़ा पाएंगे जिनकी आर्थिक स्थिति बेहद मजबूत होगी।
तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ जाएंगे युवा
ऐसी स्थिति में आम जनता और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना अत्यंत कठिन हो जाएगा। अतीत के पन्नों को पलटकर देखा जाए तो इन सरकारी केंद्रों से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले छात्रों का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित माना जाता था। पूर्व समय में यहां से उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों को देश के विभिन्न संस्थानों में आसानी से नौकरियां मिल जाती थीं। लेकिन वर्तमान समय में हो रहे इस बदलाव से न केवल आर्थिक शोषण बढ़ेगा बल्कि बेरोजगारी की समस्या भी विकराल रूप धारण कर लेगी। जानकारों का स्पष्ट रूप से मानना है कि यदि इस व्यवस्था पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले दिनों में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो जाएगी और युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।
