जबलपुर। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में शासकीय संभागीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था अर्थात आईटीआई को निजी हाथों में सौंपने की प्रशासनिक कवायद के खिलाफ व्यापक असंतोष पनपने लगा है। आदिवासी कांग्रेस की नेत्री रूकमणि गोटिया के नेतृत्व में इस संभावित नीतिगत फैसले के विरोध की रूपरेखा तैयार की गई है। इसके लिए ग्रामीण अंचलों में सघन जन जागरण अभियान शुरू किया गया है ताकि युवाओं को एकजुट करके शासन की इस योजना को रोका जा सके। संगठन का स्पष्ट मत है कि यदि सरकारी तकनीकी संस्थानों को निजी क्षेत्र को दिया गया तो गरीब, अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए तकनीकी शिक्षा हासिल करना तथा रोजगार के अवसर पाना बेहद कठिन हो जाएगा।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग पर पड़ेगा असर
वर्तमान व्यवस्था के अंतर्गत इन संस्थानों में योग्यता और मेरिट सूची के आधार पर नाममात्र के शुल्क पर दाखिला मिलता है। इस व्यवस्था से आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के मेधावी छात्र भी कौशल विकास का लाभ उठाकर विभिन्न उद्योगों में काम पाने अथवा स्वयं का छोटा कारोबार शुरू करने में सक्षम होते हैं। निजी प्रबंधन आने के बाद प्रशिक्षण शुल्क में भारी वृद्धि होना तय माना जा रहा है। महंगी फीस होने की दशा में केवल संपन्न परिवारों के बच्चे ही यह तकनीकी कोर्स कर सकेंगे। गांवों में पहले से ही आजीविका के सीमित साधन उपलब्ध हैं। ऐसे हालात में व्यावसायिक शिक्षा महंगी होने से ग्रामीण प्रतिभाएं बिना हुनर के रह जाएंगी और उनकी आत्मनिर्भरता की संभावनाएं पूरी तरह समाप्त हो जाएंगी।
निजीकरण के विरुद्ध व्यापक जनांदोलन की तैयारी
संभावित निजीकरण की भनक लगते ही कस्बों और बस्तियों में चौपालों का दौर आरंभ हो चुका है। युवाओं की टोलियां बनाकर इस विषय पर परिचर्चाएं आयोजित की जा रही हैं ताकि नीति के हर पहलू से लोगों को अवगत कराया जा सके। जन प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जनकल्याणकारी संस्थानों को बाजार के हवाले करने से सामाजिक असंतुलन गहराएगा। शासन स्तर पर इस दिशा में कोई भी कदम उठाए जाने की स्थिति में ब्लॉक स्तर से लेकर जिला मुख्यालयों तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए जाएंगे। इस क्रम में ज्ञापन सौंपने, जनसंवाद करने और हस्ताक्षर अभियान चलाने की कार्ययोजना भी बनाई गई है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर आम जनता की भावनाएं पहुंचाई जा सकें।
