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फर्जी प्रमाण-पत्र से खुला खेल, निरस्त हुआ सीवर टेंडर



जबलपुर। नगर निगम की महत्वाकांक्षी अमृत-2.0 परियोजना के अंतर्गत जोन 1 में 759 करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित 682.275 किलोमीटर लंबी सीवर लाइन बिछाने की योजना गंभीर तकनीकी विवाद में उलझ गई है। इस गतिरोध के चलते नगर के 1,65,999 घरों को सीवर चेंबर एवं ड्रेनेज कनेक्टिविटी से जोड़ने का कार्य बीच में ही रुक गया है। टेंडर प्रक्रिया में देश की 8 निर्माण कंपनियों ने अपनी दावेदारी पेश की थी, जिसमें हैदराबाद की फर्म स्टैंडर्ड्स इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड पर मुरैना सीवरेज कार्य के फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र लगाने के आरोप प्रमाणित हुए। नगरीय प्रशासन विभाग भोपाल की स्टेट लेवल टेक्निकल कमेटी द्वारा मई 2026 में आयोजित 67वीं बैठक में विस्तृत परीक्षण उपरांत इस निविदा को निरस्त कर दिया गया था। शासन स्तर पर मूल अभिलेखों की पड़ताल लंबित होने से निगम नया रिवाइज्ड टेंडर जारी नहीं कर पा रहा, जिससे 18 वर्षों से जारी भूमिगत निकासी का विकास कार्य ठप है।

हैदराबाद की फर्म पर लगा फर्जीवाड़े का ठप्पा

​अमृत-2.0 योजना के अंतर्गत पूरे सीवरेज नेटवर्क के निर्माण का लक्ष्य अनुबंध के अनुसार 48 माह की समयसीमा में पूर्ण किया जाना तय था। तकनीकी संवीक्षा के दौरान संबंधित निर्माण एजेंसी द्वारा प्रस्तुत कागजी दावों की असलियत खुलकर सामने आ गई। फर्म के खिलाफ मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में पूर्व में निष्पादित कार्यों के दस्तावेजों में जालसाजी पाई गई। इस गंभीर वित्तीय व तकनीकी अनियमितता की जांच पहले से ही आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो के समक्ष विचाराधीन थी। राज्य स्तरीय समिति ने निर्धारित मानकों का खुला उल्लंघन पाए जाने पर अनुबंध प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की अनुशंसा की।

भोपाल में अभिलेखों की जांच से अटका काम

​निविदा निरस्तीकरण के पश्चात स्थानीय निकाय को नए सिरे से संशोधित प्रस्ताव आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू करनी थी। नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय स्तर पर निविदा से संबंधित मूल संचिकाओं का विधिवत परीक्षण अब तक पूरा नहीं किया जा सका है। मुख्यालय स्तर पर तकनीकी सत्यापन का कार्य अधूरा रहने के कारण स्थानीय स्तर पर नवीन दिशा-निर्देश निर्धारित करने में व्यावहारिक कठिनाई आ रही है। विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन में निर्माण लागत और तकनीकी रूपरेखा का अनुमोदन शासन से प्रतीक्षित रहने की वजह से जिम्मेदार अधिकारी अग्रिम विज्ञापन जारी करने की स्थिति में नहीं हैं।

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