एफआईआर की शर्त और सर्वर डाउन होने से महीनों अटकी प्रक्रिया, फाइलों का लगा अंबार
जबलपुर। नगर निगम और कलेक्ट्रेट के बीच तालमेल की कमी से पुराने जन्म प्रमाण पत्रों के डिजिटाइजेशन का काम गंभीर रूप से अटक गया है। इस शासकीय प्रक्रिया की सुस्त रफ्तार के कारण आम नागरिकों को 1 से 2 दिन नहीं बल्कि 4 से 6 महीनों तक दोनों कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। नगर निगम की जन्म-मृत्यु शाखा से दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड होते ही कलेक्ट्रेट कार्यालय से खारिज कर दिए जाते हैं। कलेक्ट्रेट द्वारा पुराने रिकॉर्ड के एवज में एफआईआर की अनिवार्य प्रति मांगे जाने से जनता और कर्मचारियों के बीच विवाद गहरा रहा है। सर्वर की निरंतर तकनीकी खराबी ने स्थिति को और पेचीदा बना दिया है। इस संबंध में जन्म-मृत्यु शाखा प्रभारी तरुण जैन ने व्यवस्था सुधार का भरोसा दिलाया है।
एफआईआर की मांग पर रोज हो रहे विवाद
पुराने दस्तावेजों को ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज कराने के लिए आने वाले आवेदकों को जटिल प्रशासनिक नियमों का सामना करना पड़ता है। निगम कर्मी जब पोर्टल के जरिए संबंधित फाइल आगे बढ़ाते हैं, तो दूसरी तरफ कलेक्ट्रेट स्तर पर सत्यापन के दौरान रुकावट खड़ी हो जाती है। पुलिस रिपोर्ट प्रस्तुत करने की शर्त के कारण आवेदन निरस्त होने का सिलसिला लगातार बना हुआ है। घंटों कतार में खड़े रहने के बाद जैसे ही आवेदन निरस्त होने की सूचना मिलती है, लोगों का धैर्य जवाब दे देता है और काउंटर पर मौजूद कर्मचारियों के साथ तीखी बहस की नौबत आ जाती है।
ठप पोर्टल से लगातार बढ़ती जा रही पेंडेंसी
सत्यापन की उलझनों के साथ-साथ तकनीकी बुनियादी ढांचा भी इस धीमी कार्यप्रणाली का एक बड़ा कारण बन गया है। जब भी ऑपरेटर तेजी से डेटा प्रविष्टि का काम शुरू करते हैं, तभी मुख्य सर्वर ठप हो जाता है। नेटवर्क धीमा होने के कारण सैकड़ों फाइलों का निस्तारण समय सीमा में नहीं हो पा रहा है। प्रतिदिन लंबित मामलों की संख्या घटने के बजाय कई गुना बढ़ रही है। इस पर प्रशासनिक पक्ष का दावा है कि सॉफ्टवेयर और नेटवर्क से जुड़ी रुकावटों को चिन्हित कर लिया गया है तथा पोर्टल के संचालन को दुरुस्त करने के लिए विभागीय स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं।
