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मौसम में बदलाव: वायरल और डेंगू के मरीज बढ़े, स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी हुई दो गुनी



जबलपुर। जिले में बदलते मौसम और उमस के कारण वायरल संक्रमण का प्रसार तेजी से हो रहा है। इसके साथ ही सर्दी, खांसी, तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, उल्टी, दस्त और कमजोरी के मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है। क्षेत्र में डेंगू और मलेरिया के मरीज भी लगातार सामने आ रहे हैं। इस स्थिति के चलते शहर के विक्टोरिया अस्पताल, नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल, रांझी सिविल अस्पताल और माढ़ोताल सहित विभिन्न ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में सुबह से ही मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं। अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की संख्या सामान्य दिनों की अपेक्षा दोगुनी हो गई है। चिकित्सकों ने बताया कि यह संक्रमण एक मरीज से दूसरे में तेजी से फैल रहा है, जिससे परिवार में एक व्यक्ति के बीमार पड़ते ही अन्य सदस्य भी प्रभावित हो रहे हैं।

​संक्रमण से बचाव के लिए बरतें विशेष सावधानी

​स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान में फैल रहा वायरस सामान्य नहीं है। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों पर इसका प्रभाव अधिक देखा जा रहा है। विशेष रूप से 5 साल से कम उम्र के बच्चों और 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों में संक्रमण के लक्षण तेजी से उभर रहे हैं। चिकित्सकों ने सलाह दी है कि यदि घर का एक भी सदस्य बीमार हो तो उसे तुरंत अन्य सदस्यों से दूरी बनाए रखनी चाहिए। मरीज के लिए अलग बिस्तर का उपयोग करना आवश्यक है। इसके अलावा तौलिया, पानी की बोतल और अन्य व्यक्तिगत सामान साझा करने से बचना चाहिए। हाथों को बार-बार साबुन और पानी से साफ धोना संक्रमण के फैलाव को रोकने में बेहद मददगार सिद्ध होता है। घर के आसपास जलभराव न होने देना और स्वच्छता बनाए रखना इस समय सबसे जरूरी उपाय है।

​बिना डॉक्टर की सलाह दवाइयां न लें

​चिकित्सकों ने नागरिकों से अपील की है कि बीमारी के लक्षण दिखने पर बिना डॉक्टरी परामर्श के मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं लेना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति को लगातार 3 दिन से अधिक समय तक तेज बुखार बना रहता है, तो उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल जाकर खून की जांच करानी चाहिए। इसके अतिरिक्त लगातार उल्टी आना, सांस लेने में तकलीफ होना या शरीर में प्लेटलेट्स कम होने के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। अस्पतालों में मुफ्त जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध है। समय पर सही उपचार और आवश्यक सावधानी ही इस संक्रामक बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है। हल्की सी लापरवाही भी स्वास्थ्य स्थिति को बिगाड़ सकती है, इसलिए शुरुआती लक्षणों पर ही सतर्कता बरतें।

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