नाना देशमुख विश्वविद्यालय ने बदला कॉपियों के परीक्षण का नियम
जबलपुर। जबलपुर स्थित नाना देशमुख वेटनरी साइंस यूनिवर्सिटी ने पशुचिकित्सा डिप्लोमा की मुख्य और पूरक परीक्षाओं के मूल्यांकन में व्यापक बदलाव किया है। विश्वविद्यालय कार्यपरिषद की हरी झंडी मिलने के बाद अब उत्तर पुस्तिकाओं पर परीक्षार्थियों का अनुक्रमांक नहीं रहेगा। परीक्षा नियंत्रक आरबी सिंह के अनुसार रोल नंबर का स्थान अब विशेष बारकोड लेगा। इस संपूर्ण कोडिंग व डिजिटल स्कैनिंग का दायित्व एमपी ऑनलाइन को सौंपा गया है। नए नियम के दायरे में प्रदेश के 5 शासकीय और 6 अशासकीय संस्थान आएंगे। इन सभी 11 महाविद्यालयों में प्रति केंद्र 100 सीटों के मान से कुल 1200 सीटें हैं। इससे करीब 4000 शिक्षार्थियों की कॉपियां जांची जाएंगी। इस पूरी व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य मूल्यांकन में शुचिता, गोपनीयता और निष्पक्षता लाना है, जिससे किसी भी स्तर पर विद्यार्थी या कॉलेज की पहचान उजागर न हो सके और दूरदराज के छात्रों को उनकी वास्तविक मेहनत का पूरा हक मिले तथा अनुचित लाभ की गुंजाइश हमेशा के लिए खत्म हो।
डिजिटल स्कैनिंग से परीक्षक नहीं जान सकेंगे पहचान
पुरानी पद्धति में पहले पन्ने पर छात्र विवरण मौजूद रहता था। नई तकनीकी व्यवस्था के तहत मुख्य पृष्ठ से व्यक्तिगत जानकारियां पूरी तरह हटा दी जाएंगी। केंद्र पर स्कैनिंग पूरी होने के उपरांत जांचकर्ताओं को सिर्फ सांकेतिक कोड वाली उत्तर पुस्तिकाएं मिलेंगी। शिक्षकों को यह पता नहीं चलेगा कि बंडल किस जिले अथवा अध्ययन केंद्र से आया है, जिससे व्यक्तिगत प्रभाव का डर खत्म होगा।
संविदा प्राध्यापक भी अब जांचेंगे डिप्लोमा कॉपियां
कॉपी परीक्षण की गति तेज करने के लिए नियमों में वैधानिक संशोधन किया गया है। पहले यह दायित्व केवल नियमित शिक्षकों तक सीमित था, जिससे परिणाम आने में काफी देरी होती थी। अब संविदा सहायक प्राध्यापकों को भी जांच का अधिकार मिल गया है। जांच दल बड़ा होने से कार्यभार संतुलित होगा और आगामी सत्र से अंकसूचियां तय समय पर जारी हो सकेंगी।
