जबलपुर। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने शहर में टेलीकॉम क्लस्टर और मैनुफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने की मांग उठाई है। संस्था ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र भेजकर विरोध जताया है। अंग्रेजों के दौर से स्थापित 7 टेलीकॉम संस्थानों के बावजूद टेलीकॉम जोन ग्वालियर दिए जाने से नाराजगी है। डॉ. पी.जी. नाजपांडे, रजत भार्गव, टी.के. रायघटक, डी.के. सिंह, एड. वेदप्रकाश अधौलिया, सुशीला कनौजिया, सुभाष चन्द्रा, मनीष शर्मा, संतोष श्रीवास्तव, दिलीप कुण्डे, डॉ. रमेश चन्द्र सोनो, डी.आर. लखेरा, पी.एस. राजपूत, अशोक यादव, यशवंत कोष्टा, श्याम सोलंकी, के.सी. सोनो, निर्मला कुशवाहा, पूर्णिमा, अशोक नामदेव, विनयकराव सोर्ते, सुंदरलाल, एड. ब्रजेश साहू, अर्जुन, विनय दुबे और मनीषा साहू ने 15 अगस्त के बाद आंदोलन का निर्णय लिया है।
लगातार छिन रहे शहर के बड़े दफ्तर
जबलपुर का ऐतिहासिक टेलीकॉम सेक्टर अब पूरी तरह बर्बादी की कगार पर पहुंच चुका है। अंग्रेजों के जमाने से स्थापित इस मजबूत आधारभूत ढांचे को धीरे-धीरे पूरी तरह नष्ट किया जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में एक के बाद एक कई महत्वपूर्ण टेलीकॉम संस्थानों के अधिकार और सेटअप छीने जा चुके हैं। रिज रोड पर स्थित प्रसिद्ध डॉ. भीमराव अंबेडकर टीटीसी का प्रशासनिक दर्जा और कद काफी घटा दिया गया। इसके बाद सिविल लाइन क्षेत्र स्थित संचार भवन के महत्वपूर्ण टेक्निकल डेवलपमेंट सर्कल को हमेशा के लिए पूरी तरह समाप्त कर दिया गया। इतना ही नहीं, हाई कोर्ट परिसर के पास संचालित क्वालिटी एश्योरेंस एंड इंस्पेक्शन कार्यालय को मध्य प्रदेश से बाहर बंगलोर स्थानांतरित कर दिया गया। अब इस नई कार्रवाई में टेलीकॉम मैनुफैक्चरिंग जोन भी जबलपुर से छीनकर सीधे ग्वालियर को सौंप दिया गया है, जिससे स्थानीय लोगों में भारी असंतोष फैल रहा है।
न्यायालय की आड़ में अनदेखी का आरोप
नागरिक मंच की ओर से इस पूरे मामले पर लगातार पत्राचार किए जाने के बाद भी संबंधित विभाग केवल केंद्रीय मंत्रालय के निर्देशों की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लेता है। पूर्व में वर्ष 2015 के दौरान इस अन्याय के खिलाफ हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी, लेकिन अदालत ने इसे सरकार का नीतिगत विषय बताकर हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया था। अब जबलपुर शहर के साथ हो रहे इस लगातार सौतेले व्यवहार और भेदभाव को खत्म करने के लिए नया टेलीकॉम क्लस्टर घोषित करना बेहद अनिवार्य हो गया है। जबलपुर के हक और अधिकारों को पुनः प्राप्त करने के उद्देश्य से आगामी 15 अगस्त के बाद शहर के तमाम नागरिक और जनसंगठन मिलकर सड़कों पर उतरेंगे और एक बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।
