पेंशन गणना विवाद में अब लार्जर बेंच तय करेगी कर्मचारियों की पुरानी सेवा का मोल
जबलपुर। मध्य प्रदेश में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की पेंशन से जुड़े एक अहम मामले को सिंगल बेंच ने लार्जर बेंच के समक्ष भेज दिया है। अदालत में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता राजेन्द्र कुमार पाण्डेय ने पक्ष रखा जबकि राज्य सरकार का बचाव शासकीय अधिवक्ता सुयश ठाकुर ने किया। सुनवाई में नियमितीकरण और संविलियन से पूर्व की गई सेवा अवधि को पेंशन के लिए अर्हक सेवा मानने के कानूनी पहलुओं पर गहन विचार किया गया। अब यह बड़ी बेंच तय करेगी कि वर्षों तक कामचलाऊ स्थापना में कार्य करने वाले कर्मियों को उनके पुराने कार्यकाल का लाभ पेंशन में मिलेगा या नहीं। इस कानूनी प्रक्रिया का परिणाम प्रदेश के उन हजारों कर्मचारियों का भविष्य तय करेगा जिन्हें लंबी सेवा के बाद नियमित किया गया था।
बड़ी बेंच तय करेगी पेंशन की अर्हक सेवा
अदालत के सामने यह एक बड़ा विषय है कि वर्षों तक सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं देने वालों के हकों की रक्षा कैसे हो। इस प्रकरण में मुख्य रूप से 2 कानूनी सवाल निर्मित किए गए हैं जिनका उत्तर अब विस्तृत पीठ को देना है। पहला बिंदु यह है कि आकस्मिक या कामचलाऊ स्थापना से नियमित स्थापना में संविलियन किए गए कर्मी की पेंशन के लिए अर्हक अवधि की शुरुआत किस दिन से मानी जाए। प्रशासन और कर्मचारियों के बीच यही मुख्य विवाद है कि दैनिक वेतन भोगी के रूप में जो समय बिताया गया है उसे सेवाकाल का हिस्सा माना जा सकता है या नहीं। कई विभागों में लोग 10 से 20 वर्षों तक बिना स्थायी पद के काम करते रहे हैं और अंत में उन्हें पक्का किया गया। ऐसे में उनके शुरुआती संघर्ष के दिनों का मूल्यांकन आवश्यक हो गया है। न्यायालय को सभी नियमों का परीक्षण करके यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पात्र व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय न हो।
पुरानी सेवा अवधि जुड़ने पर टिका है भविष्य
लार्जर बेंच के सामने दूसरा महत्वपूर्ण प्रश्न यह विचारणीय है कि नियमित होने से पहले दी गई सेवाओं की संपूर्ण अवधि को पेंशन लाभ के उद्देश्य से शामिल किया जाना वैधानिक रूप से उचित है या नहीं। यह मामला सिर्फ 1 या 2 व्यक्तियों तक सीमित नहीं है बल्कि इसका सीधा प्रभाव समूचे प्रदेश के उन हजारों पूर्व कर्मचारियों पर पड़ना तय है जो अपने संबंधित विभाग में स्थायी होने से पहले कई वर्षों तक रोजमर्रा के वेतन पर कार्यरत थे। इन तमाम लोगों को अब अदालत के अंतिम निर्णय का बेसब्री से इंतजार है क्योंकि इससे उनके रिटायरमेंट के बाद का आर्थिक ढांचा तय होगा। यदि अदालत संविलियन से पूर्व की सेवा को मान्यता देती है तो सभी कर्मचारियों को बेहतर पेंशन मिल सकेगी। इस फैसले से दैनिक वेतन भोगी कर्मियों की पेंशन गणना और पूर्व सेवा अवधि से जुड़े सभी कानूनी संशय हमेशा के लिए समाप्त हो जाएंगे।
