जबलपुर। जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय प्रशासन ने कक्षाओं से नदारद रहने वाले छात्र-छात्राओं पर लगाम कसने के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी का कड़ा फैसला लिया है। प्रोफेसर्स की तर्ज पर अब छात्र-छात्राओं को भी क्लास में प्रवेश से पहले अनिवार्य रूप से पंच आधारित ई-अटेंडेंस लगानी होगी। यह नई डिजिटल व्यवस्था अक्टूबर से शुरू हो रहे नए शिक्षण सत्र से जबलपुर, रीवा और महू स्थित तीनों वेटेरनरी कॉलेजों में एक साथ लागू कर दी जाएगी। डीन डॉ. एसएस तोमर के अनुसार कक्षाओं में विद्यार्थियों की कम होती संख्या को देखते हुए यह सख्त कदम उठाया गया है, जिससे सभी यूजी, पीजी और पीएचडी पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले 2000 से अधिक विद्यार्थियों की दैनिक उपस्थिति पर सीधी निगरानी रखी जा सकेगी।
बायोमेट्रिक पंचिंग से तैयार होगा पारदर्शी डिजिटल रिकॉर्ड
मौजूदा समय में कक्षाओं के भीतर उपस्थिति दर्ज करने के लिए अलग-अलग पारंपरिक तौर-तरीकों का सहारा लिया जाता है। इसके चलते छात्र-छात्राओं की वास्तविक मौजूदगी का सही आकलन करना संस्थान के लिए काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा था। कई विद्यार्थी परिसर में समय पर पहुंचने के बाद भी शोध कार्य, विभागीय ड्यूटी अथवा अन्य कारणों का हवाला देकर नियमित लेक्चर्स से गायब हो जाते हैं। पंचिंग सिस्टम शुरू होने के बाद प्रत्येक छात्र की उपस्थिति का सटीक रिकॉर्ड सीधे सॉफ्टवेयर पर डिजिटल रूप से संकलित रहेगा। इससे विभाग और कॉलेज स्तर पर अधिकारियों को यह पता लगाने में आसानी होगी कि कौन सा छात्र लंबे समय से पढ़ाई से दूरी बना रहा है। व्यवस्था में पारदर्शिता आने से कक्षाओं में छात्रों की नियमित उपस्थिति में तेजी से सुधार देखने को मिलेगा।
हर विषय में 75 प्रतिशत उपस्थिति होना अनिवार्य है
विश्वविद्यालय के नियमानुसार परीक्षा में शामिल होने के लिए हर कक्षा में कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य रखी गई है। जबलपुर कॉलेज में छात्रों की कम मौजूदगी पर डीन डॉ. एसएस तोमर ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि लगातार कम होती हाजिरी से पढ़ाई का स्तर प्रभावित हो रहा है। इसी समस्या के स्थाई समाधान के लिए सभी कक्षाओं की उपस्थिति की गहन समीक्षा कराई जा रही है। पहले चरण में जबलपुर, रीवा और महू के वेटरनरी कॉलेजों में इस आधुनिक प्रणाली के परिणाम देखे जाएंगे। इसके सफल क्रियान्वयन के बाद आवश्यकतानुसार विश्वविद्यालय से संबद्ध अन्य सभी शैक्षणिक संस्थानों और रिसर्च सेंटरों में भी विद्यार्थियों के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी का यही नियम पूरी तरह लागू किया जाएगा।
