गोरा बाजार शराब दुकान पर दूरी का तकनीकी विवाद बढ़ा
जबलपुर। गोरा बाजार में शराब दुकान के संचालन को लेकर विवाद गहरा गया है। अधारताल तहसील कार्यालय की जांच रिपोर्ट में दुकान से स्कूल की दूरी 100 मीटर से ज्यादा और मस्जिद की दूरी 97.4 मीटर दर्ज की गई है। मस्जिद प्रबंधन द्वारा वक्फ बोर्ड से जुड़े दस्तावेज 3 बार नोटिस देने के बाद भी पेश नहीं किए जा सके। आबकारी विभाग तहसीलदार की इस रिपोर्ट से असहमत है और उसने छावनी परिषद से नए सिरे से जांच की मांग की है। दूसरी ओर छावनी परिषद द्वारा 6 अगस्त को 2 दिन का अल्टीमेटम दिए जाने के बाद अभी तक दुकान खुली रहने से स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मूल रूप से बिलहरी के लिए मंजूर दुकान नियम विरुद्ध गोरा बाजार लाई गई।
दूरी की नपाई पर विभागों में तकरार
प्रशासनिक स्तर पर कराई गई जांच के बाद तकनीकी पेच सुलझने के बजाय और उलझ गया है। अधारताल तहसील की राजस्व टीम ने मौके का मुआयना कर बताया था कि प्रस्तावित स्थल से शैक्षणिक संस्थान 100 मीटर के दायरे से बाहर है, जो नियमानुसार सही है। वहीं समीप स्थित मस्जिद की दूरी 97.4 मीटर आंकी गई है, जिससे विवाद की स्थिति बनी। आबकारी विभाग का कहना है कि दुकान का आवंटन वैधानिक नियमों के तहत हुआ है। आबकारी अफसरों ने राजस्व विभाग की नपाई को अंतिम मानने से इनकार करते हुए छावनी परिषद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से निष्पक्ष जांच कराने को कहा है। इधर मस्जिद प्रबंधन की तरफ से वक्फ रिकॉर्ड न सौंपे जाने के कारण स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।
नोटिस की मियाद बीतने के बाद भी संचालन जारी
शराब दुकान हटाने को लेकर स्थानीय संघर्ष समिति और रहवासी लगातार आंदोलन कर रहे हैं। छावनी परिषद प्रशासन ने 6 अगस्त को दुकान संचालक को चेतावनी पत्र थमाते हुए 2 दिन में कारोबार समेटने या परिसर सील करने का निर्देश दिया था। इस मियाद को गुजरे कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन दुकान पर कोई प्रशासनिक ताला नहीं लगा। नियमों की अनदेखी से नाराज क्षेत्रवासियों का कहना है कि अफसर ठोस कदम उठाने से बच रहे हैं। धार्मिक स्थल और स्कूल के निकट शराब की बिक्री से इलाके का सामाजिक वातावरण दूषित हो रहा है। नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि तुरंत कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र बनाया जाएगा।
स्थान बदलने के आरोप पर गरमाई राजनीति
इस मामले में अब प्रशासनिक अनियमितताओं के साथ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह शराब दुकान वास्तव में बिलहरी क्षेत्र के लिए स्वीकृत की गई थी, जिसे आबकारी अमले की साठगांठ से गोरा बाजार के मुख्य इलाके में लाकर खोल दिया गया। आगामी नगरीय निकाय चुनाव को देखते हुए विभिन्न राजनीतिक दल भी मैदान में कूद पड़े हैं और जनभावनाओं के सहारे दबाव बना रहे हैं। नागरिक मोर्चा पूरे मामले के मूल दस्तावेजों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग पर अड़ा है। वहीं संबंधित विभाग दुकान की वर्तमान स्थिति को वैध ठहराने की दलीलें दे रहा है।
