इंदौर के औद्योगिक विकास को रफ्तार देने वाले उपकेंद्र का प्रदेश के विकास में रहा है अहम योगदान
जबलपुर। मध्य प्रदेश के औद्योगिक विकास और ऊर्जा के क्षेत्र में मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर ली है। इंदौर स्थित 132 केवी क्षमता वाले पोलोग्राउंड एक्स्ट्रा हाईटेंशन सबस्टेशन ने अपनी स्थापना के गौरवशाली 60 वर्ष पूरे कर लिए हैं। यह उपकेंद्र प्रदेश के शुरुआती बुनियादी ढांचों में से एक है, जिसने शहरों की तरक्की में बड़ा योगदान दिया है। इस संबंध में जबलपुर स्थित पावर ट्रांसमिशन कंपनी के मुख्यालय से आधिकारिक जानकारी जारी की गई है। कंपनी ने बताया कि इस ऐतिहासिक सबस्टेशन को 30 अगस्त 1966 को पहली बार ऊर्जीकृत किया गया था। इस सबस्टेशन का मालवा क्षेत्र के व्यापारिक और शहरी विकास में बहुत बड़ा हाथ रहा है। यह उपकेंद्र पूरे मालवा अंचल का दूसरा और मध्य प्रदेश का पांचवां सबसे पुराना एक्स्ट्रा हाईटेंशन सबस्टेशन है। इंदौर को एक समय में भारत का मैनचेस्टर कहा जाता था क्योंकि वहां कपड़ा बनाने की बहुत बड़ी बड़ी मिलें संचालित होती थीं। उन मिलों की भारी भरकम मशीनों को चलाने গুজराने के लिए जिस बिजली की जरूरत होती थी, वह आपूर्ति इसी सबस्टेशन के जरिए की जाती थी। वक्त के साथ इंदौर शहर का बहुत विस्तार हुआ, नई औद्योगिक इकाइयां खुलीं और आबादी भी तेजी से बढ़ी, जिसके कारण बिजली की मांग में भारी इजाफा हुआ। इसके बावजूद इस सबस्टेशन ने अपनी क्षमता साबित की और आज 60 साल बाद भी यह पूरी तरह से काम कर रहा है। वर्तमान में भी यह उपकेंद्र इंदौर महानगर की बड़ी आबादी को बिना किसी रुकावट के विश्वसनीय बिजली सप्लाई करने वाले सबसे प्रमुख केंद्रों में गिना जाता है।
