भोपाल. मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में भोपाल जिले के जगदीशपुर में रविवार (19 जुलाई 2026) को विशेष कैबिनेट बैठक आयोजित की गई। जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इसमें मुख्य रूप से समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को मंजूरी दी गई।
सीएम मोहन यादव ने आगे कहा कि क्या राम क्या रहीम सभी को बराबर का अधिकार देने जा रहे है। 22 मई 2026 को समान नागरिक संहिता को पब्लिक में लॉन्च किया गया। प्रदेशभर से 10 लाख लोगों के सुझाव मिले। इसमें 80 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं ने कहा UCC लागू होना चाहिए। जबकि 40 प्रतिशत पुरुषों ने भी इसका सपोर्ट किया।
एमपी यूसीसी लागू करने वाला चौथा राज्य
उन्होंने आगे कहा कि 3 करोड़ से अधिक एसएमएस भेजे गए। 94 प्रतिशत लोगों ने माना की कानून लागू होना चाहिए। मध्यप्रदेश चौथा राज्य बना जहां समान नागरिक कानून लागू होगा। विधानसभा मानसून सत्र में लाने से पहले कैबिनेट में ष्टष्ट पर मुहर लगाई दी है।
गोवा, उत्तराखंड और गुजरात में यूसीसी लागू
सीएम मोहन यादव ने कहा कि यह समान नागरिक कानून 1961 में पहले गोवा में लागू किया गया। फिर 2025 में उतराखंड, 2026 में गुजरात में लागू किया गया। असम विधानसभा में इस कानून को पारित करने की पहल की गई है।
विधानसभा मानसून सत्र में पेश करेंगे बिल
समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट कैबिनेट में लाया जाएगा। जिसको लेकर कैबिनेट में मंजूरी मिल सकती है। पिछले मंगलवार को आयोजित कैबिनेट में सीएम मोहन यादव ने ड्राफ्ट को मंजूर करने का ऐलान किया था। इस विधेयक को 20 से 24 जुलाई तक आयोजित विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा।
इन जनजातियों पर लागू नहीं होगा यूसीसी कानून
संवैधानिक सुरक्षा-कवच का सम्मान करते हुए यह कानून संविधान के अनुच्छेद 342 और अनुच्छेद 366 (खंड 25) के तहत आने वाली अनुसूचित जनजातियों जैसे भील, गोंड, कोरकू, बैगा, सहरिया और भारिया पर लागू नहीं होगा। इसके अलावा, जिन समुदायों के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा संविधान के तहत की गई है, उन्हें भी इस कोड से विशेष रूप से बाहर रखा गया है। कोड का परिभाषा वाला हिस्सा इसके अधिकार क्षेत्र को तय करता है। उत्तराधिकार से जुड़े जिन शब्दों की परिभाषा इसमें नहीं है, उनके लिए भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925 के अर्थ मान्य होंगे।
निकाह हलाला को मानना, मजबूर करना अपराध
अब महिलाओं को भी यह अधिकार दिया गया है कि यदि उनके पति ने शादी के समय किसी दूसरी महिला को गर्भवती किया है, तो पत्नी शादी को रद्द घोषित करने की मांग कर सकती है। लोगों के लिए शादी और तलाक दोनों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है।
शहरी क्षेत्रों में एमपी ई-नगर पालिका पोर्टल और ग्रामीण क्षेत्रों में एसडीएम, नगरपालिका या पंचायत के जरिए यह प्रक्रिया पूरी होगी। रजिस्ट्रेशन न होने से शादी अमान्य नहीं होगी, लेकिन रजिस्ट्रार द्वारा बिना ठोस लिखित कारण के आवेदन खारिज करने पर जुर्माने का प्रावधान है। तलाक के बाद उसी जीवनसाथी से दोबारा शादी करने के लिए निकाह हलाला जैसी अपमानजनक या नीचा दिखाने वाली शर्तों को मानना, बढ़ावा देना या मजबूर करना एक दंडनीय आपराधिक अपराध माना जाएगा।
