पुलिस के अनुसार जबलपुर के कोतवाली थाना के पीछे दरहाई में रहने वाले कृष्णकुमार सोनी की बेटी खुशबू की शादी 7 मई 2026 को दमोह निवासी सचिन सोनी के साथ हुई थी। शादी में माता पिता ने उपहार स्वरूप 3 लाख नगद, सोने की चेन अंगूठी तथा अन्य गृहस्थी का सामान दिया था। शादी के 15 दिन बाद खुशबू का भाई यश सोनी खुशबू को दमोह से लेकर जबलपुर आया था। इस दौरान खूशबू ने बताया कि सास कांता सोनी द्वारा मकान खरीदने के लिए दस लाख रुपए की मांग की जा रही है। मायके वालों के समझाने पर खूशबू ससुराल दमोह चली गई। 23 जून को खुशबू फिर आपने मायके आ गई। दो जुलाई को खुशबू की अपने पति सचिन से बात हुई, इसके बाद से खुशबू चुप हो गई। परिजनों के पूछने पर कहा कि पति सचिन द्वारा मकान खरीदने के लिए दस लाख रुपए की मांग की जा रही है। तीन जुलाई को सुबह दस बजे के लगभग खुशबू कहकर निकली कि मंदिर जा रही है और उसने ग्वारीघाट में अग्रवाल धर्मशाला के पास एसटीपी प्लांट में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इधर दोपहर एक बजे तक घर न लौटने पर परिजन चितिंत हो गए, उन्होने बेटी की तलाश आसपास की पता नहीं चला। इस दौरान ग्वारीघाट थाना से उसके मोबाइल पर कॉल आया, जिसपर परिजन पहुंचे तो देखा कि खुशबू लोहे की सीढ़ी पर फांसी पर लटक रही है। पुलिस ने मर्ग जांच में मिले तथ्यों के आधार पर पति सचिन सोनी एवं सास कांती सोनी दोनों निवासी बड़ा पुल साहू धर्मशाला के सामने दमोह कोतवाली के विरूद्ध धारा 80(2), 85, 3(5) बीएनएस तथा 3, 4 दहेज अधिनियम का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।
सुसाइड नोट में लिखा, पापा मुझे माफ कर देना-
पुलिस को जांच के दौरान घटना स्थल पर एक सुसाइड नोट मिला, जिसमें खुशबू ने लिखा था कि पापा मुझे माफ कर देना, इसके अलावा पास में पानी की बाटल, चिप्स का पैकेट जिसके अंदर काला पाउडर एवं 720 रूपये रखे थे।
खाना नहीं दिया, बात नहीं की, मोबाइल फोन छीन लिया-
पुलिस को मायके पक्ष के लोगों ने बताया कि शादी के कुछ दिन बाद से ही खुशबू को प्रताडि़त किया जाने लगा था, सास बात नहीं करती थी, खाना नहीं दिया जा रहा था, यहां तक कि मायके पक्ष से बात करने पर उसका मोबाइल फोन भी छीन लिया गया था। खुशबू ने मायके पहुंचकर परिजनों को यह बात बताई थी।
दरहाई स्थित घर से निकलकर ग्वारीघाट पहुंची थी-
पुलिस को पूछताछ में पता चला कि खुशबू घटना के दिन घर से कहकर निकली थी वह मंदिर पूजा करने जा रही है। लेकिन वह मंदिर न जाकर ग्वारीघाट पहुंच गई और प्लांट की लोहे की सीढ़ी पर फंदा डालकर फांसी लगा ली।