जबलपुर। जबलपुर में अनुदान प्राप्त स्कूलों के 155 शिक्षक पिछले तीन महीने से वेतन के लिए परेशान हो रहे हैं. राज्य भर में लगभग 600 अनुदान प्राप्त शालाएं संचालित होती हैं, जहां शिक्षकों का वेतन सरकारी बजट पर निर्भर करता है. लोक शिक्षण संचालनालय यानी डीपीआई द्वारा मांग के आधार पर राशि बांटी जाती है, जिसके लिए हर साल भौतिक सत्यापन कराना अनिवार्य होता है. सत्र 2026-27 के लिए डीपीआई के निर्देश जारी होने के बावजूद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा समय पर रिपोर्ट नहीं भेजी गई. समय पर रिपोर्ट न पहुंचने के कारण मई और जून का वेतन जारी नहीं हो सका, जिससे शिक्षकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है.
अधिकारियों की लापरवाही से संकट में शिक्षकों का परिवार
इस पूरे वित्तीय संकट का सबसे बुरा असर जबलपुर के 155 शिक्षकों पर पड़ा है. इसके अलावा ग्वालियर के 93, इंदौर के 79 और मुरैना के 76 शिक्षक भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं. कुल 12.34 करोड़ रुपये का बजट अटका हुआ है, जिससे शिक्षकों को घर चलाने के लिए कर्ज लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. मई में जो बजट मिला था, उससे केवल मार्च और अप्रैल का पुराना वेतन ही बांटा जा सका था. अब जुलाई का महीना भी बीतने को है, लेकिन शिक्षकों को एक-एक पाई के लिए मोहताज होना पड़ रहा है.
वेतन न मिलने से बढ़ रहा भारी कर्ज का बोझ
कर्मचारी संघों ने इस गंभीर लापरवाही के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है. संघ ने इस संबंध में कमिश्नर डीपीआई को ज्ञापन सौंपा है, जिसके बाद कमिश्नर ने संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी को सात दिन के भीतर पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. यदि समय पर बजट और रिपोर्ट का काम पूरा नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में शिक्षकों का यह आंदोलन और अधिक तेज हो सकता है, जिससे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है.
