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सीजेपी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ, अन्य मांगों पर सरकार से बनी सहमति के बाद आंदोलन किया समाप्त

नई दिल्ली. कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने शनिवार को जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ अपना विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया. केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह और सीजेपी प्रतिनिधिमंडल के बीच बातचीत में मांगों पर सहमति बनने के बाद आंदोलन वापस लेने का ऐलान किया गया है. एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में, सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि यह फैसला इस समझ के बाद लिया गया कि शर्तों को तय समय के अंदर लागू किया जाएगा.

दास ने कहा, कॉकरोच जनता पार्टी यह ऐलान करती है कि हम अच्छी नीयत से विरोध प्रदर्शन वापस ले रहे हैं, इस समझ के साथ कि तय शर्तों को तय समय के अंदर लागू किया जाएगा. उन्होंने कहा कि हमारी सभी मांगें मान ली गई हैं, इसलिए हम विरोध प्रदर्शन करने वालों से आग्रह करते हैं कि वे तुरंत हट जाएं और शांति से घर लौट जाएं. हम आपको अपनी आगे की रणनीति या किसी और मुद्दे के बारे में बताएंगे. लेकिन हम विरोध प्रदर्शन करने वालों से आग्रह करते हैं कि वे तुरंत हट जाएं.

कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से एक्स पर जारी बयान में कहा गया है कि कॉकरोच जनता पार्टी ने अपना देशव्यापी आंदोलन तुरंत वापस ले लिया है. कॉकरोच जनता पार्टी ने कहा कि सभी मांगें सरकार ने मान ली हैं, इनमें-

- नीट पेपर लीक से जुड़ी आत्महत्याओं के परिवारों को ज्यादा से ज्यादा मुआवजा दिया जाए.

- केंद्र सरकार और एनडीए शासित राज्यों की सभी एफआईआर वापस ले ली जाएंगी, और भविष्य में इन विरोध प्रदर्शनों में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी.

- सीजेपी के 5-पॉइंट एग्जाम रिफॉर्म चार्टर पर सरकार विचार करेगी और सीजेपी इन सुधारों पर आगे चर्चा करने के लिए सरकार से मिलेगी.

सरकार ने मांनी मांगें, क्या बोले जेपी नड्डा

इस बीच, नड्डा ने कहा कि सरकार ने डेलीगेशन की मांगें मान ली हैं, जिसमें यह भी शामिल है कि प्रोटेस्टर्स के खिलाफ कोई पुलिस एक्शन नहीं लिया जाएगा और सुसाइड करने वाले स्टूडेंट्स के परिवारों को नियमों के मुताबिक मुआवजा दिया जाएगा. नड्डा ने कहा कि आज हमारी लंबी बातचीत हुई. वे एक लिखा हुआ ड्राफ्ट लाए थे, जिसमें उन्होंने आंदोलन में चल रहे मामलों के बारे में चार बातें कहीं. इसके साथ ही, हमने बाकी दो मांगों पर भी बात की. कोई बदले की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए, मुआवजा दिया जाना चाहिए, और उनके पांच-पॉइंट चार्टर पर विचार किया जाना चाहिए. उन्होंने आगे कहा, हम उन्हें एफआईआर की कॉपी देंगे, और कोई एक्शन नहीं लिया जाएगा. दूसरी बात जो कही गई है, वह यह है कि मुआवजे के बारे में, सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि हमें भी हमदर्दी है. हम सभी ने कहा है कि नियम और कानून के हिसाब से मुआवजा दिया जाएगा.


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