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संडे को औचक निरीक्षण से मचा हड़कंप, डेयरी पर ठोका जुर्माना




जबलपुर। नगर निगम आयुक्त राम प्रकाश अहिरवार ने रविवार सुबह गढ़ा और कछपुरा संभाग का औचक निरीक्षण किया। मानसून के दौरान शहर की सफाई और वर्षाजल निकासी की हकीकत जानने के लिए उन्होंने अपर आयुक्त अशफाक परवेज कुरैशी, कार्यपालन यंत्री जी एस मरावी, स्वास्थ्य अधिकारी अभिनव मिश्रा, संभागीय अधिकारी दिनेश प्रताप सिंह और अनिल बारी, वीरेंद्र पाण्डेय, अनूप पटेल तथा मुख्य स्वच्छता निरीक्षक आनंद राव, संतोष गौर, संतोष माहौर व अभिषेक मिश्रा के साथ सघन दौरा किया। निरीक्षण में सफाई व्यवस्था बेहतर मिलने पर निगमायुक्त ने संतोष जताया, लेकिन शुक्ला नगर में पूजा डेयरी के संचालक को सड़क पर अवैध रूप से व्यवसाय करते पाए जाने पर 1000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। उन्होंने जल भराव की स्थिति से निपटने के लिए कंट्रोल रूम को 24 घंटे सतर्क रहने के सख्त निर्देश दिए हैं।

सफाई मित्रों के जज्बे से महक उठा इलाका

​निरीक्षण के दौरान गढ़ा और कछपुरा के विभिन्न वार्डों में सफाई का स्तर काफी सुदृढ़ मिला। मानसून के मद्देनजर नालों की सफाई और वर्षाजल निकासी के लिए किए गए इंतजाम धरातल पर प्रभावी दिखे। निगमायुक्त ने सुबह की पहली किरण के साथ कार्य में जुटे सफाई मित्रों की पीठ थपथपाकर उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि किसी भी स्थिति में व्यवस्था में ढिलाई न हो। उन्होंने सभी फील्ड अमले को निर्देश दिए कि जल भराव की सूचना मिलते ही तत्काल रिस्पॉन्स टीम मौके पर पहुंचे। अधिकारियों की पूर्व नियोजित रणनीति और मैदानी कर्मचारियों की मुस्तैदी का ही परिणाम है कि इस बार नागरिकों को जल भराव की समस्या से बड़ी राहत मिली है, जिसे आगे भी इसी प्रकार बनाए रखना होगा।

सड़क पर गंदगी फैलाने पर लिया सख्त एक्शन

​निगम प्रशासन का यह औचक दौरा यह संदेश देने के लिए पर्याप्त था कि शहर की स्वच्छता और नागरिकों की सुविधा से समझौता नहीं किया जाएगा। शुक्ला नगर में सड़क मार्ग को घेरकर व्यवसाय करने पर पूजा डेयरी संचालक पर की गई 1000 रुपये की कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि निगम अब अतिक्रमण के प्रति भी गंभीर है। निगमायुक्त ने निरीक्षण के दौरान गलियों का सूक्ष्म अवलोकन किया और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निरंतर मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सफाई केवल एक दिन का काम नहीं बल्कि निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें जनसहभागिता और निगम के अमले की जवाबदेही दोनों ही अनिवार्य हैं। 

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