शहडोल। वर्दी में बनाए गए वीडियो के चलते इंटरनेट मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने वाले ातायात पुलिस में पदस्थ प्रधान आरक्षक विवेकानंद तिवारी को ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और उसी दौरान वर्दी में वीडियो इंटरनेट मीडिया पर अपलोड करने के आरोप में निलंबित किया गया था। अब उन्होंने पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया। विभाग ने अभी उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है और जांच जारी है। आगे जांच रिपोर्ट के बाद ही उनका भविष्य तय होगा। विवेकानंद के फेसबुक, यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर 1.88 करोड़ से अधिक फालोवर्स हैं। उनकी प्रतिमाह आय 6 से 7 लाख रुपये है।
निलंबन रील से नहीं, गलतफहमी से हुआ
प्रधान आरक्षक विवेकानंद तिवारी का कहना है कि सभी चैनल पत्नी के नाम हैं और विभाग को बैंक डिटेल सौंप दी है। उन्होंने कहा कि निलंबन रील से नहीं, बल्कि मेडिकल अवकाश की गलतफहमी से हुआ। मानसिक तनाव और अनिद्रा के कारण डाक्टर ने उन्हें एक सप्ताह आराम की सलाह दी थी। इसकी सूचना वाट्सएप ग्रुप पर दी थी।
सोशल मीडिया की आय से किए सामाजिक कार्य
उन्होंने कहा कि अवकाश के दौरान जो वीडियो अपलोड हुए, वह पहले से रिकार्ड थे और पत्नी ने अपलोड किए थे। तिवारी ने कहा कि इंटरनेट मीडिया से हुई आय का उपयोग उन्होंने हेलमेट वितरण जैसे सामाजिक कार्यों में किया। लगातार मानसिक दबाव के कारण उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
पुलिस विकल्पों को नकारा
पुलिस ने निलंबन से पहले दो विकल्प दिए थे। पहला एसपी कार्यालय के मीडिया सेल में रहकर शासकीय जनजागरूकता अभियान चलाना। दूसरा पुलिस मुख्यालय के इंटरनेट मीडिया सेल में पदस्थापना। हालांकि विवेकानंद ने ये विकल्प नकार दिए।
