जबलपुर। जिले की निरन्दपुर प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति में वर्ष 2015 के दौरान किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत बड़े पैमाने पर गड़बड़ी किए जाने का सनसनीखेज मामला अब एक बार फिर से पूरी तरह गर्मा गया है. विधानसभा में इस गंभीर मुद्दे के जोर-शोर से उठाए जाने के बाद हरकत में आए जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित जबलपुर ने तुरंत एक तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन कर इस पूरे पुराने प्रकरण की नए सिरे से गहराई से छानबीन शुरू कर दी है. आरोप लगाया गया है कि योजना के नियमों को ताक पर रखकर वास्तविक अन्नदाताओं और पात्र किसानों के हितों की अनदेखी की गई तथा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अपात्र लोगों को नियमों के विरुद्ध ऋण स्वीकृत कर दिया गया. आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार इस समिति के माध्यम से 8 लोगों को करीब 18 लाख रुपये का केसीसी ऋण वितरित किया गया था.
जांच रिपोर्ट संतोषजनक नहीं पाई गई
भ्रष्टाचार की इस पूरी परत के खुलने के पीछे राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर हुई गहमागहमी मुख्य रूप से जिम्मेदार रही है. पनागर क्षेत्र के विधायक सुशील तिवारी इंदु द्वारा विधानसभा के पटल पर इस मामले को प्रमुखता से उठाए जाने के तुरंत बाद बैंक प्रशासन की नींद खुली और प्रशासनिक अमला हरकत में आया. बैंक प्रबंधन ने खुद इस बात को स्वीकार किया है कि वर्ष 2023 में की गई पिछली जांच की रिपोर्ट संतोषजनक नहीं पाई गई थी, जिसके कारण अब इस पूरे मामले की नए सिरे से विस्तृत और पारदर्शी जांच कराई जा रही है. इस समिति के संचालन में बैंक के चीफ मैनेजर, शाखा प्रबंधक और मार्केटिंग अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल रहे हैं.
केवल लोन नहीं खरीदी भी जांच के दायरे में
जांच के दायरे में तत्कालीन समिति प्रबंधक रमेश सोनी और तत्कालीन अध्यक्ष प्रहलाद पटेल की संलिप्तता और भूमिका भी अब बहुत प्रमुखता से सामने आ रही है. बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी नितेश जिंदल ने बताया कि इस मामले में गंभीर अनियमितताएं मिलने के बाद सेवानिवृत्त प्रबंधक के अंतिम भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है. इसके साथ ही तत्कालीन अध्यक्ष के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने के लिए सहकारिता विभाग के उपयुक्त को एक औपचारिक पत्र भी भेजा गया है. जांच अधिकारियों के अनुसार इस समिति के दायरे में केवल केसीसी ऋण का मामला ही नहीं आता है, बल्कि धान और गेहूं की बंपर खरीदी, किसानों को किए जाने वाले भुगतान और अन्य वित्तीय लेन-देन भी शामिल हैं. सार्वजनिक सीईओ श्री जिंदल ने यह भी स्पष्ट किया कि प्राप्त होने वाली शिकायतों के आधार पर विस्तृत जांच जारी है और जांच रिपोर्ट हाथ आते ही सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
