जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में ओबीसी आरक्षण के मामले में 24 जून से प्रतिदिन सुनवाई होगी। प्रशासनिक जज आनंद पाठक व न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की विशेष युगलपीठ ने सात वर्ष से लंबित ओबीसी आरक्षण विवाद मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रतिदिन सुनवाई करने का निर्णय लिया है।ओबीसी आरक्षण को लेकर आज यह मामला आज सुनवाई के लिए नियत था। लेकिन कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी। सामान्य वर्ग की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति के कारण सुनवाई टल गई। मामले से संबंधित 91 याचिकाएं व संबद्ध प्रकरण समक्ष सूचीबद्ध थे। न्यायालय ने संकेत दिए कि अब इस बहुस्तरीय विवाद को लंबित रखने के बजाय नियमित सुनवाई के माध्यम से तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। हाई कोर्ट में भोजनावकाश के बाद ओबीसी के पैरोकार वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने युगलपीठ के समक्ष आग्रह किया कि मुख्य याचिकाओं पर सुनवाई प्रारंभ की जाए। उन्होंने वैकल्पिक रूप से यह भी निवेदन किया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 18 फरवरी, 2026 को पारित आदेश के आलोक में अंतरिम आदेशों को निरस्त करने संबंधी लंबित आवेदनों पर विचार किया जाए।उनका तर्क था कि आरक्षण विवाद के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की नियुक्तियां वर्षों से अटकी हुई हैं और अनेक उम्मीदवार लगभग सात वर्ष से अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। युगलपीठ ने साफ किया कि मुख्य याचिकाओं की ओर से उपस्थित होने वाले अधिवक्तागण न्यायालय में मौजूद नहीं हैं। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि संबंधित प्रकरण पहली बार इस नई युगलपीठ के समक्ष सूचीबद्ध हुए हैं। ऐसे में व्यापक सुनवाई के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है। इसी परिप्रेक्ष्य में हाई कोर्ट ने 24 जून, 2026 से मामले की प्रतिदिन (डे-टू-डे) सुनवाई करने के निर्देश जारी किए।