जबलपुर। मदन महल रेलवे स्टेशन पर रविवार की रात एक बड़ा हादसा होने से टल गया जब प्लेटफॉर्म नंबर 4 पर लगी इलेक्ट्रिक लिफ्ट अचानक बीच रास्ते में जाम हो गई। गाड़ी संख्या 12854 अमरकंटक एक्सप्रेस से उतरे लगभग 15 यात्री दूसरी तरफ जाने के लिए रात में इस लिफ्ट में सवार हुए थे। क्षमता से अधिक यात्री और भारी सामान होने के कारण लिफ्ट ऊपर नहीं पहुंच पाई और फंस गई। लिफ्ट के भीतर लगभग डेढ़ दर्जन लोग पूरे 50 मिनट तक फंसे रहे जिसमें एक ढाई साल का मासूम बच्चा भी शामिल था। यात्रियों की चीख-पुकार सुनकर आरपीएफ के एएसआई विजय बहादुर सिंह ने तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और मुख्य रेलवे स्टेशन से लिफ्ट मैकेनिक शिवा को बुलाया जिसने सभी यात्रियों को सकुशल बाहर निकाला।
सवारी और सामान के ओवरलोड से बीच में अटकी लिफ्ट
रविवार की रात को अमरकंटक एक्सप्रेस के आते ही यात्रियों में बाहर निकलने की होड़ मच गई। इसी जल्दबाजी में क्षमता से कहीं अधिक यात्री अपने भारी-भरकम सामान के साथ प्लेटफॉर्म नंबर 4 की लिफ्ट में सवार हो गए। लिफ्ट जैसे ही ऊपर की ओर बढ़ी वह अत्यधिक वजन के कारण बीच रास्ते में ही पूरी तरह लॉक हो गई। लिफ्ट के बंद होने से उसके अंदर हवा की कमी होने लगी और यात्री घबराने लगे। स्टेशन पर ओवरलोडिंग को रोकने के लिए वहां कोई रेल कर्मी या सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं था जिससे यह विकट स्थिति निर्मित हुई।
यात्रियों की चीख-पुकार,आरपीएफ की त्वरित कार्रवाई
रात 21:40 बजे से लेकर 22:30 बजे तक पूरे 50 मिनट यात्री बंद लिफ्ट के अंदर घुटने वाले माहौल में कैद रहे। घबराहट के कारण जब अंदर से बच्चों और महिलाओं के रोने-चीखने की आवाजें आने लगीं तो प्लेटफॉर्म पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही आरपीएफ आउट पोस्ट के एएसआई विजय बहादुर सिंह ने बिना वक्त गंवाए तुरंत मोर्चा संभाला और राहत कार्य शुरू कराया। उन्होंने पीड़ित यात्रियों को लगातार ढांढस बंधाया और बाहर से बातचीत कर उनका हौसला बनाए रखा ताकि ऑक्सीजन की कमी से अंदर कोई बेहोश न हो।
मैकेनिक की सूझबूझ से सुरक्षित बचाए गए सभी पैसेंजर
घटना की गंभीरता को देखते हुए एएसआई ने तुरंत जबलपुर मुख्य स्टेशन से लिफ्ट मैकेनिक शिवा को आपातकालीन संदेश भेजकर बुलाया। मैकेनिक शिवा ने मौके पर आकर लिफ्ट की तकनीकी खराबी को तत्काल दूर किया और उसे सूझबूझ से नीचे की तरफ सुरक्षित उतारा। इसके बाद लिफ्ट का दरवाजा खोलकर सभी 15 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया जिससे उनकी जान में जान आई। यात्रियों ने बाहर आते ही राहत की सांस ली। इस घटना के बाद रेल प्रशासन अब स्टेशनों पर लगी सभी लिफ्टों की नियमित तकनीकी जांच कराने की बात कह रहा है ताकि भविष्य में ऐसी खतरनाक गड़बड़ी दोबारा न हो।
