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जबलपुर हवाई सेवाओं में कटौती पर बढ़ा आक्रोश, सांसद तन्खा ने इंडिगो को लिया आड़े हाथ


जबलपुर।
महाकौशल क्षेत्र के प्रमुख शहर जबलपुर और दिल्ली के बीच हवाई उड़ानों में की गई कटौती को लेकर राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इंडिगो एयरलाइन के प्रबंध निदेशक राहुल भाटिया को टैग करते हुए इस निर्णय को क्षेत्र के साथ अन्याय करार दिया है। सांसद ने स्पष्ट किया कि 1 जुलाई से दिल्ली-जबलपुर-दिल्ली के बीच मॉर्निंग फ्लाइट को 7 दिन के बजाय मात्र 4 दिन संचालित करने का निर्णय यात्रियों और व्यापारियों के लिए बेहद कष्टकारी है। इस कटौती से कटनी, सिवनी, नरसिंहपुर, मंडला और दमोह जैसे जिलों के यात्रियों पर सीधा असर पड़ेगा। सांसद ने विमानन कंपनी से इस जनविरोधी फैसले पर तत्काल प्रभाव से पुनर्विचार करने की मांग की है ताकि आम लोगों को हो रही परेशानी को रोका जा सके।

​हवाई सेवाओं की कमी से आम जन परेशान

​जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट से उड़ानों की संख्या कम होने से सबसे ज्यादा नुकसान व्यापारिक वर्ग को उठाना पड़ रहा है। सुबह की फ्लाइट होने से उद्यमी और व्यापारी दिल्ली जाकर अपना काम निपटाकर उसी दिन वापस लौट आते थे, लेकिन अब यह सुविधा समाप्त होने की कगार पर है। चिकित्सा या अन्य आपातकालीन स्थिति में दिल्ली जाने वाले मरीजों के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक बन गई है। पिछले कुछ महीनों में शहर से संचालित होने वाली कई महत्वपूर्ण उड़ानों पर पहले भी कैंची चलाई जा चुकी है, जिससे हवाई कनेक्टिविटी पर बुरा असर पड़ा है। इस बार इंडिगो द्वारा किए गए बदलाव ने यात्रियों के सामने यात्रा का कोई अन्य विकल्प नहीं छोड़ा है। नागरिक हलकों में इस स्थिति को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

​सांसद ने दी चेतावनी क्षेत्र की अनदेखी न करें

​राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से इंडिगो प्रबंधन को घेरते हुए सीधे सवाल किए हैं। उन्होंने पूछा है कि किस आधार पर दिल्ली की फ्लाइट्स में इतनी भारी कटौती की गई है। सांसद ने इस निर्णय के पीछे के तर्कों को गलत बताते हुए इसे क्षेत्र की जरूरतों के विरुद्ध बताया है। जबलपुर एक बड़े जनसंख्या क्षेत्र का केंद्र है और यहां से दिल्ली की कनेक्टिविटी अत्यंत आवश्यक है। सांसद ने उड़ानों की स्थिति को स्पष्ट करते हुए एयरलाइन प्रबंधन को चेतावनी दी है कि वे क्षेत्र की अनदेखी न करें। अब देखना यह है कि इंडिगो प्रबंधन सांसद की इस मांग पर क्या कदम उठाता है और यात्रियों को राहत मिलती है या नहीं।

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