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रेलवे स्कूल संचालन समिति की कार्यकारिणी भंग, 37 लाख की फीस गड़बड़ी के बाद कड़ा एक्शन

भोपाल. पश्चिम मध्य रेलवे के रेलवे स्कूल में फीस घोटाले के बाद संचालन समिति को भंग कर दिया गया है। साथ ही स्कूल की नई कार्यकारिणी के चुनाव कराने का फैसला किया गया है। नई कार्यकारिणी के बनने तक केंद्र का प्रभार रेलवे के वेलफेयर इंस्पेक्टर को सौंपा गया है। यहां बता दें, रेलवे स्कूल में 37 लाख रुपए फीस की गड़बडिय़ों सामने आई हैं। स्कूल का संचालन पश्चिम मध्य रेलवे समाज कल्याण केंद्र करता है।

37 लाख निकालने का कोई हिसाब नहीं

स्कूल फीस में गड़बड़ी का मामला मई 2026  में सामने आया, जब स्कूल के शिक्षकों और कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिला। इसके बाद स्कूल के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच शुरू हुई। आरोप है कि 2024-25 और 2025-26 में छात्रों से प्राप्त करीब 37 लाख रुपए की फीस राशि नकद निकाली गई, लेकिन उसका कोई हिसाब नहीं दिया गया। शिकायत के बाद रेल प्रशासन ने जांच शुरू की थी। फीस में गड़बड़ी का आरोप पमरे मजदूर संघ के पदाधिकारी पर लगा था, जिसे बाद में संघ ने पद से अलग कर दिया.

फीस और बस बिक्री जांच के घेरे में

रेलवे की जमीन पर संचालित इस स्कूल में केजी-1 से 12वीं तक की कक्षाएं संचालित होती हैं। यहां रेलवे कर्मचारियों और आसपास की कॉलोनियों के बच्चे पढ़ते हैं। छात्रों से हर माह 300 से 800 रुपए तक फीस ली जाती है, जिससे स्कूल का संचालन और शिक्षकों-कर्मचारियों का वेतन दिया जाता है। जांच के दौरान स्कूल कैंपस में खड़ी बस की बिक्री का मामला भी सामने आया। 

बस बिक्री की राशि संस्था के खाते में जमा नहीं

स्कूल और  समिति से जुड़े लोगों का आरोप है कि बस दो से तीन लाख रुपए में बेची गई, लेकिन राशि संस्था के खाते में जमा नहीं की गई। हालांकि, तत्कालीन सचिव नितिन परमार का कहना है कि बस की बिक्री समिति के प्रस्ताव और सामूहिक सहमति से की गई थी तथा संबंधित दस्तावेज रेल प्रशासन को उपलब्ध करा दिए गए हैं। 

जांच रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई

रेल अधिकारियों के मुताबिक फीस राशि, खातों से निकाली गई रकम और बस बिक्री से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी है। इसकी रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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