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बार काउंसिल चुनाव: छतरपुर के वोट बदलेंगे चुनावी गणित



फिलहाल भोपाल के वकीलों की बड़ी बढ़त, इंदौर और जबलपुर के प्रत्याशी पिछड़े

जबलपुर। मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल चुनाव 2026 की मतगणना के छठे दिन जबलपुर में मुख्य चुनाव अधिकारी एसके पालो, सहायक चुनाव अधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह बघेल और दीपक अवस्थी की देखरेख में भोपाल के उम्मीदवारों ने जबरदस्त बढ़त बनाकर शुरुआती रुझानों में शीर्ष 5 स्थानों पर कब्जा कर लिया है। चुनाव समिति के सचिव प्रशांत दुबे के अनुसार अब तक 35 जिला और तहसील बार एसोसिएशनों के प्रथम वरीयता के कुल 8,791 मतों की गिनती पूरी हो चुकी है, जिसमें से 8,514 मत सही पाए गए और 376 मत खारिज कर दिए गए। फिलहाल 647 मतों के साथ राजेश व्यास पहले और 645 मतों के साथ डॉक्टर विजय चौधरी दूसरे स्थान पर चल रहे हैं। अब बुधवार से छतरपुर जिले के मतों की गिनती शुरू होने वाली है, जिससे इस चुनावी मुकाबले में बड़े उलटफेर की पूरी संभावना जताई जा रही है।

​रुझानों में भोपाल के वकीलों का दबदबा बरकरार

​सोमवार और मंगलवार को हुई भोपाल तथा बुरहानपुर जिले की मतों की जांच के बाद दिग्गजों ने अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। वर्तमान आंकड़ों के मुताबिक डॉक्टर पीसी कोठारी 528 मत लेकर तीसरे, महेश कुमार मौर्य 450 मतों के साथ चौथे और मोहम्मद महबूब अंसारी 394 मत पाकर पांचवें पायदान पर काबिज हैं। इंदौर के राकेश सिंह भदौरिया 369 मतों के साथ छठे और भिंड के दिनेश शुक्ला 268 मत लेकर सातवें स्थान पर संघर्ष कर रहे हैं। आठवें नंबर पर भोपाल के प्रताप भानु सिंह 263 मतों के साथ मौजूद हैं, जबकि जबलपुर के शैलेंद्र वर्मा 207 मत लेकर नौवें और इंदौर के नरेंद्र कुमार जैन 199 मतों के साथ दसवें स्थान पर बने हुए हैं। इंदौर और जबलपुर के कई बड़े प्रत्याशी शुरुआती दौर में पिछड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं।

​किंगमेकर की भूमिका निभाएगा छतरपुर 

​बार काउंसिल चुनाव के अगले चरण की तैयारी पूरी होते ही अब सबकी नजरें बुंदेलखंड के छतरपुर जिले पर टिक गई हैं। इस जिले की मतपेटियां खुलते ही वर्तमान में चल रहे शीर्ष 10 उम्मीदवारों के क्रम और मतों के अंतर में भारी फेरबदल हो सकता है। छतरपुर से मिलने वाले वोटों के आधार पर ही प्रत्याशियों की हार-जीत का अंतिम फैसला होना माना जा रहा है। यहां के वकीलों का मतदान व्यवहार सूची में शामिल कई बड़े नामों को बाहर कर सकता है और पीछे चल रहे उम्मीदवारों को शीर्ष पर पहुंचा सकता है। यही कारण है कि चुनावी विश्लेषक छतरपुर के नतीजों को इस पूरे चुनाव का टर्निंग पॉइंट मान रहे हैं।

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