एई, जेई और लाइनमैन की तिकड़ी कारोबारियों पर ढा रही कहर,मेंटेनेंस के नाम पर रोज हो रही बिजली गुल,बेबस व्यापारी अब किससे कहें अपनी दुख भरी दास्तान
जबलपुर। शहर खजरी खिरिया इंडस्ट्रियल एरिया में इन दिनों बिजली विभाग की लापरवाही के कारण व्यापारी बेहद परेशान हैं। सहायक यंत्री, कनिष्ठ यंत्री और लाइनमैन की मनमानी के चलते इस औद्योगिक क्षेत्र की बत्ती कभी भी गुल कर दी जाती है। बार-बार फॉल्ट का बहाना बनाकर दिनभर में कई बार बिजली काटी जा रही है, जिससे त्रस्त होकर उद्यमियों को भारी-भरकम डीजल खर्च कर जनरेटर चलाने पड़ रहे हैं। अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक कोई भी इस गंभीर समस्या को सुनने के लिए तैयार नहीं है। हफ्ते में 5 दिन यही बदतर स्थिति बनी रहती है। अब बारिश के मौसम का बहाना बनाकर इस अंधेरगर्दी को सही ठहराने की कोशिश की जा रही है, जबकि गर्मी में भी ऐसे ही हालात थे।
रोज बढ़ रहा है बिजली संकट
इस औद्योगिक क्षेत्र के हालात दिन-ब-दिन खराब होते जा रहे हैं। बिजली अमला बिना किसी पूर्व सूचना के कभी भी मुख्य लाइनों की सप्लाई बंद कर देता है। आंधी-तूफान आने के बाद जब बिजली गुल होती है, तब उसे सुधारने का काम तुरंत शुरू नहीं किया जाता है। हैरानी की बात यह है कि जब काफी देर बाद सप्लाई खुद चालू होती है, तब कर्मचारी मेंटेनेंस का परमिट लेकर दोबारा लाइट बंद कर देते हैं। इस पूरी प्रक्रिया के कारण फैक्ट्रियों में काम पूरी तरह ठप हो जाता है। रोज-रोज की इस अघोषित कटौती ने उत्पादन को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है।
रोजाना फॉल्ट के बहाने से उद्यमी त्रस्त
जब भी व्यापारी बिजली गुल होने की शिकायत लेकर दफ्तर पहुंचते हैं, तो उन्हें हर बार एक ही रटा-रटाया जवाब मिलता है कि लाइन में फॉल्ट आ गया है। बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर यह कैसा तकनीकी फॉल्ट है जो पिछले कई महीनों से रोज आ रहा है और विभाग इसे ठीक ही नहीं कर पा रहा है। हफ्ते में कम से कम 5 दिन व्यापारियों को इसी मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ता है। अब मानसून की शुरुआत होते ही बिजली विभाग के पास बारिश और तेज हवाओं का एक नया बहाना तैयार हो गया है, जिससे वे अपनी कमियों को छुपा रहे हैं।
जनरेटर और डीजल के उपयोग से बढ़ा आर्थिक बोझ
बिजली जाने के बाद उद्योगों को चालू रखने के लिए व्यापारियों के पास जनरेटर चलाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता है। इसके कारण रोजाना सैकड़ों लीटर डीजल व्यर्थ में जल रहा है। एक तरफ फैक्ट्रियों को भारी-भरकम बिजली बिल का भुगतान करना पड़ रहा है, तो दूसरी तरफ डीजल का अतिरिक्त खर्च व्यापारियों की कमर तोड़ रहा है। इस दोहरी मार के कारण खजरी खिरिया के उद्योगों का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है। मंदी के इस दौर में बिजली विभाग की यह लापरवाही स्थानीय व्यापार को पूरी तरह से बर्बादी की कगार पर ले आई है।
लाइनमैन और अधिकारियों का अड़ियल रवैया बना मुसीबत
क्षेत्र में तैनात लाइनमैन खुद को ही सर्वेसर्वा समझ बैठे हैं। जब कोई पीड़ित व्यापारी अपनी समस्या लेकर उनके पास जाता है, तो वे सीधे मुंह बात तक नहीं करते हैं। कनिष्ठ यंत्री और सहायक यंत्री जैसी जिम्मेदार कुर्सियों पर बैठे अधिकारी भी इस पूरे मामले में पूरी तरह संवेदनहीन बने हुए हैं। किसी भी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया जाता है। अपनी जायज मांग के लिए भटक रहे इन बेबस व्यापारियों की सुनने वाला कोई नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे पूरा अमला जानबूझकर लापरवाही बरत रहा है और उन्हें परेशान कर रहा है।
लापरवाह अमले पर सख्त कार्रवाई की जाएगी:चीफ इंजीनियर
खजरी खिरिया औद्योगिक क्षेत्र में जिस तरह से व्यापारियों को परेशान किया जा रहा है,वो बहुत गंभीर मामला है, इस क्षेत्र के जिम्मेदार अमले पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और देखा जाएगा कि ऐसा क्यों किया जा रहा है। जल्दी ही व्यापारियों की समस्या का निराकरण किया जाएगा।
एसके गिरिया, चीफ इंजीनियर, पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी
