डिजिटल रिकॉर्ड में नाम की गड़बड़ी से थमा किसान का काम
जबलपुर। जिले के नीमखेड़ा क्षेत्र के निवासी छोटे किसान संकट मोचन पटेल इन दिनों अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण खरीफ धान फसल के सीजन में खाद-बीज के लिए बेहद परेशान हैं। उनके नाम पर करीब 2.5 एकड़ संयुक्त खातेदारों की जमीन दर्ज है, लेकिन डिजिटल रिकॉर्ड में उनके सही नाम संकट मोचन पटेल के स्थान पर भूलवश शंकर मोचन पटेल दर्ज कर दिया गया है। इस विभागीय त्रुटि को सुधारने के लिए वे पिछले 3 महीनों से अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदार और पटवारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, फिर भी उनकी समस्या का कोई समाधान नहीं हो पा रहा है।
अधिकारियों की लापरवाही से किसान काट रहे दफ्तरों के चक्कर
वर्तमान समय में किसान खेतों में खरीफ धान की बुवाई की तैयारी में जुटे हुए हैं। इसके लिए उन्हें खाद और बीज जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की सख्त जरूरत है। खाद की खरीदारी के लिए किसानों को लंबी-लंबी कतारों में लगकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। एक तरफ तकनीकी विकास और डिजिटल इंडिया के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत यह है कि इस डिजिटल व्यवस्था में सुधार न होने से किसान अपनी ही जमीन और खसरे की सही जानकारी ढूंढने के लिए लगातार भटक रहे हैं। किसान आईडी बनवाने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
पटवारी और तहसील कार्यालय के बीच उलझा नाम सुधार का मामला
संकट मोचन पटेल ने धान बुवाई के समय खाद-बीज के लिए ऑनलाइन दुकान में किसान आईडी बनवाने का प्रयास किया था, तब उन्हें इस नाम की गड़बड़ी का पता चला। उन्होंने पटवारी से संपर्क किया तो इसे विभागीय गलती बताया गया। नाम सुधार के लिए किसान ने अनुविभागीय अधिकारी के यहाँ आवेदन दिया, जहाँ से फाइल तहसीलदार को भेजी गई। पटवारी ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर प्रतिवेदन जमा भी कर दिया। इसके बाद जब किसान प्रगति जानने तहसील कार्यालय पहुँचा, तो वहाँ बड़े बाबू ने पटवारी रिपोर्ट में त्रुटि बताकर दोबारा प्रतिवेदन लाने को कह दिया। इस तरह किसान लगातार विभागों के बीच भटकने को मजबूर है।
