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जबलपुर:स्वास्थ्य महकमे में डेढ़ करोड़ रुपये की अवैध वसूली का आरोप, क्षेत्रीय संचालक से शिकायत

 



जबलपुर। समाजवादी पार्टी ने जबलपुर संभाग के क्षेत्रीय संचालक को लिखित शिकायत सौंपकर लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में हुए एक बड़े भर्ती घोटाले का आरोप लगाया है। इस शिकायत में मुख्य रूप से डॉ. आदर्श विश्नोई को कटघरे में खड़ा किया गया है, जिन पर नियमों को ताक पर रखकर ग्रुप-डी के आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्तियों में भारी आर्थिक हेरफेर करने के आरोप लगे हैं। शिकायत के अनुसार जिला स्तरीय निविदा समिति और कलेक्टर की तरफ से केवल 314 पदों के लिए मानव संसाधन जुटाने की प्रशासनिक अनुमति मिली थी। इसके बावजूद तय सीमा से 182 ज्यादा नियुक्तियां कर दी गईं, जो सीधे तौर पर नियमों का खुला उल्लंघन है।

​बिना अनुमोदन के जारी हुई चयन सूची

सपा के ​शिकायतकर्ता आशीष मिश्रा के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया के लिए एक विशेष साक्षात्कार समिति का गठन किया गया था, जिसमें डॉ. आदर्श विश्नोई के साथ-साथ अजय कुरील और अरुण शाह जैसे जिम्मेदार अधिकारी भी शामिल थे। आरोप है कि डॉ. विश्नोई ने अंतिम चयन सूची पर समिति के बाकी दोनों सदस्यों के हस्ताक्षर और प्रशासनिक मंजूरी लिए बिना ही मनमाने ढंग से काम किया। उन्होंने 8 जून और 13 जून 2026 को गुपचुप तरीके से चयनित उम्मीदवारों की सूचियां विभिन्न ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर्स (बीएमओ) को भेजकर उनके पदस्थापन और जॉइनिंग की प्रक्रिया भी शुरू करवा दी। इस पूरी कार्रवाई के दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को भी पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया, जो सीधे तौर पर तय प्रशासनिक व्यवस्था और नियमों की अवहेलना को दर्शाता है।

​कंपनियों से सांठगांठ, अवैध वसूली का खेल

​उद्यमिता विकास केंद्र मध्यप्रदेश (सेडमैप) के 3 जून 2026 के आधिकारिक पत्र के मुताबिक इंटरव्यू के माध्यम से केवल 57 उम्मीदवारों का चयन वैध रूप से हुआ था। इसके उलट जेयूएस इंटरप्राइजेज के जरिए 241 और ओम पारस मैनपावर सर्विस के माध्यम से 255 लोगों को अनुचित लाभ देते हुए कुल 496 नियुक्तियां बांट दी गईं। चौंकाने वाली बात यह है कि 24 और 25 मई 2026 को सिर्फ दो दिनों के भीतर लगभग 1000 आवेदकों के साक्षात्कार दिखाने का दावा किया गया है, जो व्यावहारिक रूप से मुमकिन नहीं है। शिकायत में खुलासा हुआ है कि श्रम कानूनों का उल्लंघन करके 65 वर्ष से अधिक उम्र के मनोज गुप्ता नामक व्यक्ति को भी नौकरी पर रख लिया गया, जिसने न तो ऑनलाइन आवेदन किया था और न ही इंटरव्यू दिया था। इस पूरे मामले में आउटसोर्स एजेंसियों की मिलीभगत से प्रति उम्मीदवार लगभग 40 हजार रुपये लेकर कुल 1.5 करोड़ रुपये की अवैध वसूली का आरोप है। शिकायतकर्ता ने डॉ. विश्नोई को बर्खास्त करने और एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है।

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