जबलपुर। विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के हनुमना में स्थित 2 मेगावाट क्षमता वाले सौर ऊर्जा संयंत्र में सरकारी उपकरणों के दुरुपयोग और धांधली का बड़ा मामला उजागर हुआ है। मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड ने इस मामले में सीधी संभाग के कार्यालय कार्यपालन अभियंता में तैनात कनिष्ठ अभियंता रंजीत कुमार साहू को 25 जून 2026 को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जांच समिति द्वारा की गई शुरुआती पड़ताल में यह स्पष्ट हुआ है कि सौर संयंत्र के संयोजन और लाइन विस्तार का पूरा काम रंजीत कुमार साहू की पत्नी ममता कुमारी द्वारा संचालित फर्म मै. ओम एंटरप्राइजेज को मिला था। इस पूरे खेल में रंजीत साहू की सीधी भूमिका और सरकारी संसाधनों की हेराफेरी के गंभीर संकेत मिले हैं, जिसके बाद प्रबंधन ने सख्त कदम उठाते हुए उन्हें उमरिया अटैच कर दिया है।
सरकारी खजाने के उपकरणों का हुआ अवैध इस्तेमाल
जांच के दौरान टीम को संयंत्र स्थल पर जो उपकरण मिले, वे बेहद चौंकाने वाले थे। वहां लगी कंट्रोल केबल पर मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड का नाम लिखा हुआ था, जबकि अन्य कई विद्युत उपकरणों पर मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड की मुहर अंकित थी। नियम के विरुद्ध सरकारी बिजली कंपनियों के इन उपकरणों को निजी सौर प्लांट में इस्तेमाल करना एक बड़ी अनियमितता है। समिति ने पाया कि वीसीबी मशीनों की नेम प्लेट से क्रेता का नाम और विवरण जानबूझकर मिटा दिया गया था ताकि असली मालिक की पहचान छिपाई जा सके। इन सभी संदिग्ध उपकरणों का अब संबंधित कंपनियों से अभिलेखीय सत्यापन करवाया जा रहा है ताकि सच्चाई पूरी तरह सामने आ सके।
निलंबित अभियंता के खिलाफ कंपनी की सख्त कार्रवाई
मुख्य अभियंता प्रवर्तन रीवा द्वारा गठित जांच समिति ने स्थल निरीक्षण और दस्तावेजों के गहन परीक्षण के बाद रंजीत कुमार साहू को इस गड़बड़ी का मुख्य सूत्रधार माना है। निलंबन की कार्रवाई के दौरान उन्हें मुख्यालय उमरिया भेज दिया गया है और अब उन्हें नियमानुसार केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही मिलेगा। कंपनी प्रबंधन ने इस मामले में शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाते हुए संकेत दिए हैं कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। रंजीत साहू की पत्नी के नाम पर चल रही फर्म मै. ओम एंटरप्राइजेज की भूमिका भी अब जांच का मुख्य केंद्र बन गई है। सरकारी संपत्तियों को निजी हित में उपयोग करने के इस कारनामे की रिपोर्ट आने के बाद कंपनी आगे की कानूनी कार्रवाई और रिकवरी की तैयारी कर रही है।
भविष्य में होगी और भी कड़ी विभागीय कार्रवाई
विद्युत कंपनी की साख को बट्टा लगाने वाली इस घटना के बाद महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। जांच टीम अब उन सभी बिंदुओं को खंगाल रही है कि कैसे एक सरकारी कर्मचारी ने अपनी पत्नी की फर्म को ठेका दिलवाया और सरकारी माल का उपयोग अपने निजी प्रोजेक्ट में किया। कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि सत्यापन प्रक्रिया के बाद यदि और भी लोग इस रैकेट में शामिल पाए जाते हैं तो उन पर भी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह मामला सरकारी भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग का एक बड़ा उदाहरण बन गया है। अब सभी की निगाहें अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं कि सरकारी खजाने को हुए नुकसान की भरपाई आखिर कैसे और किससे की जाएगी।
