जबलपुर। महिला होम साइंस कॉलेज प्रशासन द्वारा बिना पूर्व सूचना के नई यूनिफॉर्म थोपे जाने के विरोध में सोमवार 22 जून को छात्राओं और अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा। पेरेंट्स एसोसिएशन ऑफ मध्य प्रदेश के प्रांतीय अध्यक्ष सचिन गुप्ता की अगुवाई में दर्जनों पीड़ित छात्राओं ने इस मनमाने फैसले के खिलाफ जिला प्रशासन, कॉलेज मैनेजमेंट और उच्च शिक्षा विभाग को एक लिखित शिकायत पत्र सौंपा। इस बड़े विरोध प्रदर्शन में प्रमुख रूप से नीलम नामदेव, अंशिका गुप्ता, साक्षी सोनी, तान्या कोरी, वसुंधरा राज, दुर्गा, मुनमुन शर्मा, लक्ष्यश्री राजपूत, रिद्धिका गर्ग, नेहा गढ़वाल और दिशा कुशवाहा शामिल रहीं। आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि वर्षों से लागू पुरानी गरिमापूर्ण यूनिफॉर्म ही आगे भी जारी रखी जाए।
बिना वजह मध्यमवर्गीय परिवारों पर वित्तीय मार
अभिभावक संघ ने आरोप लगाया है कि चालू सत्र के बीच में अचानक लिया गया यह निर्णय पूरी तरह अव्यावहारिक है और इससे सामान्य परिवारों पर भारी आर्थिक चोट पहुंचेगी। शिक्षा के स्तर अथवा उसकी गुणवत्ता से कपड़ों के रंग-रूप का कोई लेना-देना नहीं होता, इसलिए छात्रहित को देखते हुए इस बेवजह के खर्चीले नियम को फौरन रद्द किया जाना चाहिए। उपस्थित जनों ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि वह खुद इस मामले में सीधे हस्तक्षेप करें ताकि छात्राओं की नियमित पढ़ाई का नुकसान न हो।
हल्के रंग से छात्राओं में भारी तनाव
कॉलेज की छात्राओं ने नए कपड़े के हल्के रंग को लेकर गंभीर सुरक्षात्मक और व्यावहारिक आपत्ति दर्ज कराई है। उनका तर्क है कि हल्का रंग होने के कारण मासिक धर्म की अवधि के दौरान उन्हें अत्यधिक मानसिक परेशानी और संकोच का सामना करना पड़ेगा। इसके मुकाबले पुरानी गहरी यूनिफॉर्म हर लिहाज से ज्यादा सुरक्षित, उपयोगी और सहज थी। इस बदलाव के पीछे किसी खास कपड़े के दुकानदार को अनुचित मुनाफा पहुंचाने की बू आ रही है, जिसकी गहन जांच होनी चाहिए। जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक छात्राओं को पुरानी ड्रेस पहनने की छूट मिले।
