अब टैंकर ही एकमात्र सहारा,प्रशासन की व्यवस्था नाकाफी
जबलपुर। शहर इन दिनों भीषण जलसंकट की मार झेल रहा है। मानसून के आने में देरी के कारण शहर के प्रमुख जल स्रोत परियट जलाशय का जल स्तर तेजी से घट रहा है। आलम यह है कि रांझी के बाद अब सदर और उससे जुड़े इलाकों में भी पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। परियट जलाशय का अधिकतम जल स्तर 1390 फीट है, जबकि वर्तमान में यह न्यूनतम स्तर 1360 फीट के करीब पहुंच चुका है। परियट बांध से भरने वाली 13 पानी की टंकियां भी अब पूरी क्षमता से नहीं भर पा रही हैं, जिसका सीधा असर रांझी, गोकलपुर, बिलपुरा, मानेगांव और मदई जैसे क्षेत्रों पर पड़ रहा है। लोग पानी के लिए टैंकरों के पीछे दौड़ने को मजबूर हैं और भीषण गर्मी में दैनिक कार्यों के लिए पानी जुटाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
घटते स्तर ने बढ़ाई शहर की मुश्किल
परियट जलाशय के जल स्तर में लगातार गिरावट ने जल संकट को और गहरा दिया है। स्थिति इतनी विकट हो गई है कि नगर निगम के नियमित जल प्रदाय के दावे पूरी तरह फेल साबित हो रहे हैं। बस्तियों में रहने वाले लोग सुबह से ही नल के पास खाली बाल्टियां लेकर कतार में खड़े हो जाते हैं और टैंकर पहुंचते ही पानी के लिए भारी अफरा-तफरी मच जाती है। पानी की कमी के कारण लोगों के लिए नहाना और खाना बनाना तक दुश्वार हो गया है। प्रशासन की ओर से की जा रही जलापूर्ति अब नाकाफी साबित हो रही है, जिससे आम जनता का दैनिक जीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
अन्य क्षेत्रों में भी विकराल होने लगा पानी का संकट
जबलपुर के अन्य इलाकों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। खंदारी जलाशय की बात करें तो यहां स्थिति फिलहाल परियट जैसी गंभीर नहीं है, क्योंकि बोरवेल से लोगों को थोड़ी राहत मिल रही है। हालांकि, यहां भी जल स्तर लगातार गिरने से बिलहरी, कजरवारा, गोराबजार, टेमरभीटा और तिलहरी जैसे क्षेत्रों में पानी की किल्लत तेजी से बढ़ रही है। यदि आने वाले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं होती है, तो इन इलाकों में भी हालात बहुत खराब हो सकते हैं। नगर निगम पर टैंकरों की संख्या बढ़ाने और जलापूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अब शहरवासियों की उम्मीदें केवल मानसून की बारिश पर टिकी हैं।
