नियमों को ताक पर रखकर शराब सिंडिकेट का मनमाना खेल, हर बोतल पर हो रही अवैध वसूली
जबलपुर। जबलपुर जिले में शराब सिंडिकेट ने सरकारी शराब पॉलिसी की सरेआम धज्जियां उड़ा दी हैं, जिससे आम जनता की जेब पर सीधा डाका डाला जा रहा है। शहर के सदर, गोरखपुर और बलदेवबाग जैसे प्रमुख इलाकों में सरकारी प्रतिबंध के बावजूद अवैध अहाते पूरी तरह आबाद हैं। हर दुकान पर शराब प्रेमियों से हर बोतल पर 10 से 50 रुपये तक की अतिरिक्त ओवररेटिंग वसूली जा रही है। यह अवैध मुनाफा सीधे तौर पर आबकारी अफसरों और रसूखदार ठेकेदारों की जेबों में जा रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि जबलपुर के आबकारी सहायक आयुक्त संजीव दुबे भोपाल में बैठकर ही सारा कामकाज संभाल रहे हैं। उन्होंने स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और ठेकेदारों को पूरी छूट दे रखी है। जनता के लिए शिकायत करने की कोई जगह नहीं बची है और जिम्मेदार अधिकारी किसी का फोन तक नहीं उठाते हैं।
हर शाम अहातों में छलक रहे जाम
शहर के सदर, गोरखपुर और बलदेवबाग इलाकों में सरकारी नियमों को पूरी तरह से ठेंगा दिखा दिया गया है। शासन द्वारा अहाता पद्धति पर पूरी तरह से रोक लगाए जाने के बाद भी इन क्षेत्रों में दुकानों के ठीक बाजू में या पीछे खुलेआम अहाते संचालित हो रहे हैं। इन जगहों पर देर रात तक असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। स्थानीय पुलिस और आबकारी अमला सब कुछ जानते हुए भी मूकदर्शक बना हुआ है, जिससे ठेकेदारों के हौसले बुलंद हैं।
हर बोतल पर तय राशि से ज्यादा की वसूली
शराब सिंडिकेट ने अपनी मनमर्जी चलाते हुए हर ब्रांड की बोतल पर प्रिंट रेट से अधिक दाम वसूलना शुरू कर दिया है। ग्राहकों से प्रति बोतल 10 से 50 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। अगर कोई ग्राहक प्रिंट रेट पर शराब मांगने की हिम्मत करता है, तो काउंटर पर मौजूद करिंदे उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। यह मनमाना खेल पूरे शहर में बिना किसी डर के धड़ल्ले से चल रहा है।
भोपाल से चल रहा जबलपुर का काम
जबलपुर आबकारी विभाग के मुखिया और सहायक आयुक्त संजीव दुबे मुख्यालय छोड़कर ज्यादातर समय भोपाल में ही डेरा डाले रहते हैं। वहीं से कागजी तौर पर जिले की कमान संभाली जा रही है। फील्ड की पूरी जिम्मेदारी उन्होंने स्थानीय कनिष्ठ अधिकारियों और ठेकेदारों के भरोसे छोड़ दी है। इस प्रशासनिक ढीली पकड़ का फायदा उठाकर निचले स्तर के कर्मचारियों और शराब सिंडिकेट के बीच मजबूत साठगांठ बन चुकी है, जो सिर्फ अपनी जेबें भरने में लगी है।
शिकायत तंत्र ठप और जनता हुई बेबस
इस पूरे गोरखधंधे से परेशान आम जनता और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए शिकायत दर्ज कराने का कोई जरिया नहीं बचा है। आबकारी कंट्रोल रूम या स्थानीय दफ्तरों में की जाने वाली शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं होती। सहायक आयुक्त संजीव दुबे स्वयं किसी भी पीड़ित या मीडिया कर्मी का फोन उठाना जरूरी नहीं समझते। जनता पूरी तरह लाचार है और जिम्मेदार अफसरों ने सिंडिकेट के सामने घुटने टेक दिए हैं।
शिकायतों पर सख्त कार्रवाई करेंगे:कलेक्टर
सरकार द्वारा प्रतिबंधित शराब के अहाते यदि कहीं संचालित हो रहे हैं, ऐसी शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई की जाएगी और उन्हें किसी भी स्तर पर बख्शा नहीं जाएगा।
राघवेंद्र सिंह, कलेक्टर
