सागर निवासी पिता ने बेटी की तलाश न होने पर दायर की थी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने एक पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस द्वारा बरामद की गई एक नाबालिग लड़की को दोबारा उसके पिता के पास भेजने के आदेश जारी किए हैं। हाई कोर्ट के जस्टिस प्रणय वर्मा और जस्टिस जेके पिल्लई की डिवीजन बेंच ने सागर निवासी जगदीश अठिया की तरफ से दायर की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर अंतिम फैसला सुनाते हुए यह कार्रवाई की है। अदालत में याचिकाकर्ता के वकील रत्न भारत तिवारी ने दलील पेश की थी कि जगदीश अठिया की बेटी की उम्र केवल 15 वर्ष है और वह कुछ समय पहले अचानक घर से लापता हो गई थी। परिजनों ने बेटी के लापता होने की लिखित शिकायत स्थानीय थाने में दर्ज कराई थी, लेकिन शिकायत दर्ज होने के बाद भी पुलिस प्रशासन द्वारा लड़की को खोजने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किए जा रहे थे। पुलिस की इस ढीली कार्रवाई से परेशान होकर पिता ने अपनी बेटी की सुरक्षा के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाई कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पूर्व में पुलिस को सख्त निर्देश दिए थे कि लड़की को जल्द से जल्द ढूंढकर अदालत में पेश किया जाए। हाई कोर्ट के कड़े रुख के बाद हरकत में आई पुलिस ने लापता किशोरी को तलाश लिया और उसे डिवीजन बेंच के सामने हाजिर किया। अदालत के कमरे में न्यायाधीशों ने नाबालिग लड़की के बयान दर्ज किए, जिसमें उसने अपने पिता के साथ जाने की इच्छा जताई। इसके बाद कोर्ट ने औपचारिकताएं पूरी करते हुए लड़की को उसके पिता जगदीश अठिया के सुपुर्द कर दिया।
