जानकारी के अनुसार उड़धन से प्रतिदिन करीब ढाई से तीन हजार टन कोयले का डिस्पैच किया जाता है। यह कोयला बीजी साइडिंग और सड़क मार्ग के जरिए सारनी पावर हाउस भेजा जाता है। लेकिन, अब कोल स्टॉक से लगातार धुआं निकलने और आग फैलने की आशंका के चलते खदान का उत्पादन कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है। उड़धन में लगभग हर साल गर्मी के मौसम में स्वत: तपन के कारण कोयले में आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, कोल स्टॉक को वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से नहीं रखने के कारण इसके अंदर का तापमान बढऩे लगता है और धुआं निकलने लगता है। इसके बावजूद प्रबंधन द्वारा सुरक्षा उपायों पर ध्यान न देने की वजह से इस वर्ष भी स्थिति गंभीर हो गई है।
शांता कंस्ट्रक्शन कर रही उत्खनन-
उड़धन खदान में ओवरबर्डन हटाने और कोयला उत्खनन का ठेका सी-5 शांता कंस्ट्रक्शन कंपनी के पास है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के मुताबिक, यहां से 6 लाख 99 हजार 986 टन कोयले का उत्पादन दर्ज किया गया था। फिलहाल, इस पूरे मामले में खदान प्रबंधन की ओर से आग से हुए संभावित नुकसान या उत्पादन ठप होने को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है।