जबलपुर। एमपी हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या के एक चर्चित मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दोषी पति की आजीवन कारावास की सजा घटाकर सात वर्ष के सश्रम कारावास में बदल दी। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने कहा कि जब अपराध पूर्व नियोजित न होकर अचानक मिले तीव्र उकसावे में हुआ हो, तो उसका मूल्यांकन भी उसी आधार पर किया जाना चाहिए।हाई कोर्ट ने पाया कि छिंदवाड़ा जिले के कुलबहेरी नदी घाट पर पति-पत्नी के बीच अचानक विवाद हुआ। इसी दौरान पत्नी ने कथित तौर पर पति से कहा कि तुम्हारे जैसे 1000 पति रख सकती हूं। कोर्ट ने माना कि यह टिप्पणी अत्यंत अपमानजनक और तीव्र उकसावे वाली थी। इसके बाद आरोपित ने आवेश में पत्थर उठाकर पत्नी पर वार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में कहीं भी यह सिद्ध नहीं हुआ कि आरोपित हत्या की पूर्व योजना बनाकर घटनास्थल पर पहुंचा था। घटना के तुरंत बाद उसने भागने के बजाय स्वयं पुलिस और पत्नी के स्वजनों को फोन कर पूरी जानकारी दी। कोर्ट ने इसे उसके आचरण का महत्वपूर्ण संकेत माना। साथ ही यह भी कहा कि सभी चोटें केवल पत्थर से वार करने से ही लगी हों, यह निर्विवाद रूप से सिद्ध नहीं हुआ। कुछ चोटें घटनास्थल पर पत्थरों पर गिरने से भी संभव थीं।