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जबलपुर में जुटे दिग्गज श्रमिक नेता, बिजली कंपनियों के निजीकरण का किया विरोध

 


जबलपुर। जबलपुर में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में आल इंडिया इंटक के राष्ट्रीय महासचिव डॉ संजय सिंह ने मध्य प्रदेश विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन के राकेश डी पी पाठक, एन के यादव, उमाशंकर मेहता, अफसर अहमद, गोपाल चौहान, रामेश्वर गांगे, और मध्य प्रदेश इंटक के उपाध्यक्ष रामराज्य तिवारी व सचिव नरेंद्र मिश्रा सहित अनेक श्रमिक नेताओं की उपस्थिति में बिजली कंपनियों के तेजी से हो रहे निजीकरण पर गहरी चिंता व्यक्त की। बैठक में स्पष्ट किया गया कि सरकार निजीकरण की दिशा में कदम तो बढ़ा रही है, लेकिन कर्मचारियों और संविदा कर्मियों के वेतन, सुरक्षित सेवा शर्तों तथा लाखों सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन की कोई लिखित गारंटी राज्य सरकारों द्वारा नहीं दी जा रही है। इससे नियमित, संविदा और आउटसोर्स श्रेणी के कर्मचारियों के साथ-साथ पेंशन भोगियों में अपने भविष्य के प्रति भारी असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है।

​निजीकरण से संविदा और आउटसोर्स कर्मियों के शोषण की आशंका

​श्रमिक नेताओं के सामने अपनी बात रखते हुए राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि देश में बिजली कंपनियों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी बहुत तेजी से चल रही है। इस प्रक्रिया का सबसे बुरा असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा जो संविदा, आउटसोर्स या ठेका श्रमिक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसी स्थिति में इन सभी अस्थायी कामगारों का भविष्य पूरी तरह असुरक्षित हो जाएगा और उनके आर्थिक शोषण की संभावना बढ़ जाएगी। श्रम संगठनों को अपने मतभेद भुलाकर केवल श्रमिकों के कल्याण को प्राथमिकता देनी चाहिए और हर जटिल समस्या का समाधान प्रबंधन के साथ शांतिपूर्ण चर्चा के माध्यम से निकालने का प्रयास करना चाहिए।

​नई श्रम संहिता लागू होने से बढ़ीं श्रमिक संगठनों की चुनौतियां

​इस अवसर पर प्रांतीय श्रमिक पदाधिकारियों ने बताया कि देश में लागू होने जा रही नई श्रम संहिता के कारण अब कामगारों की जायज मांगों और दैनिक समस्याओं का समाधान करवाना पहले से कहीं अधिक कठिन और जटिल काम हो जाएगा। श्रम नियमों में बदलाव के कारण असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, ठेका श्रमिकों और अन्य कर्मचारियों का कानूनी सुरक्षा कवच कमजोर हुआ है। इस नए कानून के खिलाफ देश भर में इंटक संयुक्त मोर्चा के माध्यम से लगातार प्रभावी और मजबूत विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। श्रमिक हितों की रक्षा के लिए अब सभी संगठनों को अपने-अपने क्षेत्रों में पहले से कहीं ज्यादा सतर्क, सक्रिय और सक्षम होकर कार्य करने की आवश्यकता है।

​कर्मचारियों की सेवा शर्तों और नियमितीकरण पर फेडरेशन की मांग

​बैठक के दौरान विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन के पदाधिकारियों ने अपनी महत्वपूर्ण मांगें रखते हुए कहा कि सरकार को किसी भी बिजली कंपनी का निजीकरण करने से पहले सभी श्रेणी के वर्तमान कर्मचारियों के वेतन और बुजुर्ग पेंशनर्स की पेंशन की पूरी कानूनी गारंटी लेनी चाहिए। इसके साथ ही यह पूरी तरह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कर्मचारियों के लिए पूर्व में निर्धारित सेवा शर्तों में कोई भी नकारात्मक बदलाव नहीं होगा। फेडरेशन ने मांग की कि सभी कार्यरत संविदा कर्मचारियों और आउटसोर्स कर्मियों को बिना नौकरी से हटाए सीधे नियमित किया जाए और नई शासकीय भर्तियों में संविदा कर्मियों का पूरी तरह संविलयन करते हुए आउटसोर्स कर्मियों के लिए 50 प्रतिशत पद आरक्षित किए जाएं।

​श्रमिकों को न्याय दिलाने और संगठित करने का संकल्प

​बैठक के समापन पर विभिन्न क्षेत्रों के श्रमिक नेताओं ने बताया कि वे कामगारों की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए लगातार प्रयासरत हैं और कई मामलों में श्रम आयुक्त के समक्ष स्वयं पैरवी करके कर्मचारियों को न्याय दिला रहे हैं। फेडरेशन के गौरवशाली इतिहास को रेखांकित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि भूतकाल में भी कर्मचारियों के हित में कई बड़े फैसले करवाए गए हैं और वर्तमान में भी सभी श्रेणियों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा। असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की बेहतरी और उनके सुरक्षित भविष्य के लिए सभी श्रमिक संगठनों को और अधिक सुदृढ़ तथा जमीनी स्तर पर सक्रिय होकर अपनी आवाज बुलंद करनी होगी।

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