जबलपुर। मध्य प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और विशेष रूप से खोवा मिल्क के मामले में जबलपुर की एक अलग पहचान है। इसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा ग्वालियर में आयोजित मिल्क कैपिटल कार्यक्रम में इस महत्वपूर्ण शहर को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है। इस बात को लेकर स्थानीय लोगों, दुग्ध उत्पादकों और नागरिकों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने मध्य प्रदेश शासन के मुख्य सचिव को कड़ा पत्र भेजकर इस उपेक्षा का विरोध दर्ज कराया है।
80 साल से खोवा मिल्क उत्पादन में जबलपुर का दबदबा
तथ्यों और आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा खोवा मिल्क का उत्पादन जबलपुर में ही होता है। राज्य में सबसे ज्यादा डेरियों का संचालन भी इसी जिले में हो रहा है। यह रिकॉर्ड पिछले 80 वर्षों से लगातार कायम है। जबलपुर से समूचे भारत में खोवा मिल्क का निर्यात किया जाता है। इतने बड़े पैमाने पर उत्पादन और वितरण होने के बाद भी, राज्य सरकार के कार्यक्रम में इन सभी वास्तविकताओं को नहीं पूछा गया। यह कदम जबलपुर के दुग्ध व्यवसाय और उसके ऐतिहासिक योगदान के साथ बहुत बड़ा अन्याय है।
डेयरी साइंस कॉलेज छिनने व डेयरी एस्टेट के ठप होने से नाराजगी
यह उपेक्षा केवल एक कार्यक्रम तक ही सीमित नहीं है। जबलपुर के हिस्से का प्रस्तावित डेयरी साइंस कॉलेज भी छीनकर उज्जैन में स्थापित कर दिया गया। इस फैसले से क्षेत्र के युवाओं और व्यवसायियों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। इसके अलावा, शहर में बने डेयरी एस्टेट की स्थिति भी दयनीय बनी हुई है और यह पूरी तरह से ठप पड़ा है। चार साल पहले इस डेयरी एस्टेट का भव्य उद्घाटन किया गया था। उद्घाटन के चार साल बाद भी वहां एक भी डेयरी शुरू नहीं हो पाई है और यह प्रदेश का एकमात्र डेयरी एस्टेट अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने मुख्य सचिव को सौंपा ज्ञापन
इस मुद्दे पर जबलपुर के जनप्रतिनिधियों और बड़े नेताओं की चुप्पी भी लोगों को हैरान कर रही है। शहर के साथ हो रहे इस सौतेले व्यवहार पर किसी भी प्रमुख व्यक्ति का आगे न आना स्थानीय लोगों को निराश कर रहा है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की हाल ही में संपन्न बैठक में इन सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई और आगे की रूपरेखा तैयार की गई। इस बैठक में डॉ. पी.जी. नाजपांडे, रजत भार्गव, वेदप्रकाश अथौटिया, डी.आर. करेरा और सुशीला कनौजिया समेत कई गणमान्य नागरिक शामिल थे। सभी ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि जबलपुर के साथ हो रहे इस भेदभाव को तुरंत रोका जाए और शहर को उसका उचित हक प्रदान किया जाए।
