रेल मंडल हादसे के बाद भड़का आक्रोश, रेलवे बोर्ड मेंबर के सामने खुला वरिष्ठ इंजीनियर की प्रताड़ना का कच्चा चिट्ठा,संघ ने इस पूरे मामले की निष्पक्षता के लिए उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच समिति से जांच कराने की पुरजोर मांग की
जबलपुर। कोटा रेल मंडल में हुए 2 इंजीनियरों की दर्दनाक मौत के हादसे के बाद रेलवे प्रशासन और कर्मचारी संगठनों के बीच तल्खी बेहद बढ़ गई है। रेलवे बोर्ड के मेंबर इंफ्रास्ट्रक्चर विवेक गुप्ता की डीआरएम ऑफिस में मजदूर संघ के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक में वरिष्ठ मंडल इंजीनियर दक्षिण एकता मीमरोट के खिलाफ शिकायतों का अंबार लग गया। संघ ने गंभीर आरोप लगाते हुए मेंबर इंफ्रास्ट्रक्चर को बताया कि अधिकारी का व्यवहार अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के प्रति अत्यंत आपत्तिजनक है और वे नियमित रूप से गाली-गलौज, डराने, धमकाने तथा प्रताड़ित करने का कार्य करती हैं। बैठक में अधिकारियों पर निजी काम लेने, अनावश्यक दबाव बनाने और मनमाने ढंग से चार्जशीट सौंपने के भी दावे किए गए। पिछले 12 सालों से कोटा में जमीं इस अधिकारी के कार्यकाल में पहले भी डकनिया स्टेशन के पास मिट्टी ढहने से 1 ट्रैकमैन की जान जा चुकी है। इस प्रकरण को लेकर पमरे मुख्यालय तक हड़कंप मचा हुआ है।
पुराने हादसों से नहीं लिया कोई सबक
रेल प्रशासन द्वारा दावों के विपरीत पिछली गंभीर घटनाओं से कोई सीख नहीं ली गई। हाल के दिनों में 1 रेल पथ इंजीनियर को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया और 2 सुपरवाइजरों को चार्जशीट थमाई गई। इसके अतिरिक्त चौमहला अंडरपास के निर्माण के दौरान ट्रेन संचालन के समय अवैध रूप से ब्लास्टिंग की गई, जिससे कई बार ब्लॉक फेल होने की घटनाएं सामने आईं। लगातार हो रही इन लापरवाहियों के बावजूद प्रशासन द्वारा जमीनी स्तर पर सुरक्षा और काम के माहौल को सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
दोषी अधिकारी को ही जांच सौंपने से निष्पक्षता पर उठे गंभीर सवाल
ताजा हादसे में जिम्मेदार होने के बावजूद संबंधित वरिष्ठ मंडल इंजीनियर को ही पूरी घटना की जांच सौंप दी गई है। मजदूर संघ ने प्रशासन के इस निर्णय को वैचारिक रूप से पूरी तरह गलत ठहराया है और इसे मामले की लीपापोती करने का एक स्पष्ट प्रयास बताया है। कर्मचारियों में इस फैसले को लेकर भारी असंतोष है कि जिस अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल हैं, वही इस पूरे घटनाक्रम की जांच कैसे कर सकती हैं। संघ ने इस पूरे मामले की निष्पक्षता के लिए उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच समिति से जांच कराने की पुरजोर मांग की है।
