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संजीवनी नगर हत्याकांड का खुलासा: अक्सर होने वाली मारपीट का बदला लेने दोस्त ने उतारा मौत के घाट

 


जबलपुर। संजीवनी नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली धनवंतरी नगर पुलिस चौकी में 22 मई को एक युवक की गला घोंटकर हत्या करने के मामले का खुलासा हुआ है। इस वारदात को अंजाम देने वाले आरोपी आयुष यादव पिता राजेन्द्र यादव उम्र 25 वर्ष निवासी सागर कालोनी को पुलिस ने 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया है। घटना की जानकारी तब मिली जब मृतक सुरेन्द्र उर्फ चिंगम प्रधान उम्र 28 वर्ष का शव आरोग्यम् अस्पताल के पीछे बने एक कार्यालय के कमरे में मिला। मृतक के भाई अरविन्द प्रधान उम्र 36 वर्ष निवासी श्यामनगर परसवाड़ा ने पुलिस को इसकी सूचना दी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक जबलपुर सम्पत उपाध्याय, नगर पुलिस अधीक्षक गोरखपुर एमडी नागोतिया, एफएसएल अधिकारी डॉक्टर अजय सिंह और संजीवनी नगर थाना प्रभारी बी.डी. द्विवेदी तथा चौकी प्रभारी दुर्गेश मरावी ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की थी।

घटनास्थल का निरीक्षण और शव बरामदगी

​मृतक सुरेन्द्र उर्फ चिंगम प्रधान पिछले 1 वर्ष से आरोग्यम् अस्पताल के पीछे राजू पार्षद के कार्यालय वाले कमरे में अकेला रहता था। दिनांक 22 तारीख को सुबह 10 बजे जब उसका भाई अरविन्द खाना देने गया तो दरवाजा खुला था और सुरेन्द्र जमीन पर मृत अवस्था में पड़ा था। उसके बाएं हाथ की कलाई कटी हुई थी और पास में ही चाकू पड़ा हुआ था तथा गले में सफेद गमछा लिपटा था। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और फिंगर प्रिंट टीम की उपस्थिति में पंचनामा कार्रवाई कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। डॉक्टर से मिली मौखिक जानकारी में सामने आया कि युवक की मृत्यु गला घोंटने के कारण श्वांस नली टूटने से हुई थी।

चश्मदीदों के बयान और सीसीटीवी फुटेज

​जांच के दौरान पुलिस ने लालबाबा मंदिर के पास विवाद की सूचना पर सीसीटीवी फुटेज खंगाले। फुटेज के आधार पर ब्रह्मकुमारी आश्रम के पास रहने वाले गणेश शर्मा उम्र 40 साल से पूछताछ की गई। गणेश ने बताया कि दिनांक 21 मई की रात्रि करीब 11.30 से 12  बजे के बीच सुरेन्द्र स्कूटी से आया था और फोन पर चिल्ला रहा था। कुछ देर बाद ओम डेयरी के पास विवाद और गिरने की आवाज सुनकर जब गणेश अपने भांजे रितिक गौतम और यश चौधरी के साथ वहां पहुंचा तो सुरेन्द्र नशे में गिरा हुआ था। वहां मौजूद उसके दोस्त आयुष यादव ने पुलिस को फोन करने से मना किया और सुरेन्द्र को उसके कमरे पर छोड़ने की बात कही। रितिक और यश ने सुरेन्द्र को स्कूटी पर बैठाकर कमरे तक पहुंचाया और वापस आ गए, जबकि आयुष वहीं रुका रहा।

संदेही से पूछताछ और हत्या का जुर्म कबूल

​मर्ग जांच के आधार पर पुलिस ने संदेही आयुष यादव के खिलाफ धारा 103 1 बीएनएस का मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू की। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पल्लवी शुक्ला के मार्गदर्शन में गठित पुलिस टीम ने घेराबंदी कर आरोपी आयुष यादव को हिरासत में लिया। कड़ाई से पूछताछ करने पर आयुष ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। आरोपी ने बताया कि सुरेन्द्र उसके साथ अक्सर मारपीट और गाली-गलौज करता था, जिससे वह तंग आ चुका था। घटना की रात सुरेन्द्र अत्यधिक शराब के नशे में था, जिसका फायदा उठाकर आयुष ने पहले गमछे से उसका गला घोंट दिया और फिर मामले को आत्महत्या का रूप देने के लिए चाकू से उसके हाथ की नस काट दी। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने घटना में इस्तेमाल किया गया चाकू, सफेद गमछा और मृतक का मोबाइल फोन बरामद कर लिया है। इस अंधे कत्ल की गुत्थी को 24 घंटे के भीतर सुलझाने में सहायक उप निरीक्षक टीकाराम चौधरी, प्रधान आरक्षक दिलीप पाठक, आरक्षक रजनीश यादव, अमरेन्द्र कुमार, मनोज मिश्रा, पुष्पराज जाट और आशीष प्रताप सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश करने के लिए वैधानिक कार्रवाई पूरी कर ली है।

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