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भीषण गर्मी में फूटा किसानों का गुस्सा, व्यवस्था न सुधरने पर कलेक्ट्रेट में गेहूं भरने का ऐलान

 



जबलपुर। जबलपुर में भीषण गर्मी और 45 डिग्री तापमान के बीच गेहूं उपार्जन की बदहाल व्यवस्था को लेकर भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में सैकड़ों गांवों के किसानों ने कलेक्ट्रेट के पास घंटाघर पर दो घंटे तक उग्र प्रदर्शन किया। प्रांत महामंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख राघवेन्द्र सिंह पटेल की अगुवाई में मुख्यमंत्री के नाम डिप्टी कलेक्टर रघुवीर सिंह को ज्ञापन सौंपा गया। किसान नेताओं ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जिले के 14000 किसान स्लॉट बुकिंग और उपार्जन से वंचित रहे, तो वे परिवार सहित कलेक्ट्रेट परिसर में अपना गेहूं भरकर डेरा डाल देंगे। इस आंदोलन में प्रांत उपाध्यक्ष मोहन तिवारी, संभाग उपाध्यक्ष दामोदर पटेल, प्रांत मंत्री आलोक पटेल, जिलाध्यक्ष रामदास पटेल और जिला मंत्री धनंजय सिंह पटेल सहित अनेक पदाधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

सर्वर खराबी और स्लॉट बुकिंग की तत्काल बहाली की मांग

​किसानों की सबसे प्रमुख समस्या गेहूं उपार्जन के लिए डिजिटल पोर्टल पर स्लॉट बुक न हो पाना है। महाकौशल प्रांत के 24 जिलों में लगभग 118400 किसान सर्वर की तकनीकी खामियों के कारण अपनी उपज बेचने के लिए समय तय नहीं कर पा रहे हैं। इस वजह से किसान संघ ने मांग की है कि ऑनलाइन पोर्टल की कमियों को तुरंत ठीक कर स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया दोबारा चालू की जाए। इसके साथ ही पंजीकृत सभी योग्य किसानों का उपार्जन सुनिश्चित करना आवश्यक है। केंद्रों पर बारदाने की भारी कमी को दूर करने, खरीदे गए गेहूं का जल्दी परिवहन कराने और किसानों के खातों में भुगतान की गति बढ़ाने की भी मांग पुरजोर तरीके से उठाई गई। भीषण गर्मी को देखते हुए सभी केंद्रों पर ठंडे पेयजल और छायादार बैठने के इंतजाम करने का आग्रह किया गया है। आगामी खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए डीएपी खाद और अन्य आवश्यक उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक अभी से गोदामों में जमा करने की बात कही गई है ताकि आगे लाइनों में न लगना पड़े। उपार्जन व्यवस्था में बिचौलियों और व्यापारियों के अवैध दखल को पूरी तरह बंद करने की मांग करते हुए दोषी अधिकारियों और संबंधित व्यापारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की बात कही गई है।

कलेक्टर की सलाह पर उपजा असंतोष और आर्थिक नुकसान

​उपार्जन समिति के अध्यक्ष और जिला कलेक्टर द्वारा किसानों को सरकारी केंद्रों के बजाय खुली मंडी में अपनी गेहूं की फसल बेचने की सलाह दी गई थी। इस परामर्श से किसान बेहद नाराज हो गए हैं। किसान संघ के जिला पदाधिकारियों का कहना है कि प्रशासन अपनी कमियों और लचर व्यवस्थाओं को छुपाने के लिए इस प्रकार के सुझाव दे रहा है। वर्तमान में सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य और कृषि उपज मंडियों के बाजार भाव में 300 से 400 रुपये प्रति क्विंटल का एक बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। यदि किसान मजबूरी में अपनी फसल खुले बाजार या मंडियों में कम दाम पर बेचते हैं, तो उन्हें सीधा भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। किसानों का कहना है कि जब सरकार ने समर्थन मूल्य पर खरीदी की गारंटी दी है, तो प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना चाहिए और सुचारू खरीदी केंद्र चलाने चाहिए। कलेक्ट्रेट घेराव के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट रूप से सचेत किया गया है कि यदि इन बाधाओं का त्वरित निवारण नहीं हुआ तो पूरे क्षेत्र का किसान सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन शुरू करेगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी। इस विरोध प्रदर्शन में ग्रामीण क्षेत्रों से आए सैकड़ों किसानों के साथ भारतीय किसान संघ के जिला प्रचार प्रमुख भरत पटेल, पाटन तहसील अध्यक्ष मुकुल पचौरी, मंझोली तहसील अध्यक्ष वीरेंद्र पटेल, शहपुरा तहसील अध्यक्ष वीरेंद्र साहू और पनागर तहसील अध्यक्ष जितेंद्र पटेल ने सक्रिय भूमिका निभाई। इसके अतिरिक्त संगठन के वरिष्ठ सदस्य अटल पटेल, प्रेमचंद कुर्मी, धरम पटेल और रीतेश पचौरी सहित जबलपुर जिले के कोने-कोने से आए ग्रामीण उपस्थित थे। सभी कार्यकर्ताओं ने एक सुर में कहा कि किसान रात-दिन मेहनत कर अन्न उपजाता है, लेकिन जब उसे बेचने की बारी आती है तो उसे कड़कती धूप में परेशान किया जाता है। प्रशासनिक अधिकारियों ने ज्ञापन लेने के बाद समस्याओं पर विचार करने का आश्वासन दिया है।

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