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आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारियों का फूटा गुस्सा, वेतन न मिलने पर आंदोलन की तैयारी



जबलपुर। स्वास्थ्य विभाग के आउटसोर्स कर्मचारियों ने वेतन विसंगतियों और प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष दीपक कुमार के नेतृत्व में पीड़ित कर्मचारियों ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा शहरी क्षेत्र के नोडल अधिकारी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन के माध्यम से कर्मचारियों ने अपनी गंभीर आर्थिक समस्याओं को अधिकारियों के सामने रखा और जल्द से जल्द उचित समाधान की मांग की। कर्मचारियों का सीधा आरोप है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत मैनपावर सप्लाई करने वाली आउटसोर्स एजेंसियां सिग्मा इंफोटेक भोपाल और प्रकाश सिक्योरिटी ग्वालियर अपने दायित्वों का निर्वहन ठीक से नहीं कर रही हैं। इन एजेंसियों द्वारा मानदेय वितरण में लगातार घोर लापरवाही बरती जा रही है, जिसके कारण स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लगभग 250 कर्मचारियों का दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। समय पर मानदेय न मिलने से नाराज कर्मचारियों ने प्रशासन को अपनी मांगों को पूरा करने के लिए 30 मई तक का समय दिया है। यदि इस अवधि में उनकी वेतन संबंधी समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया, तो सभी कर्मचारी आगामी 1 जून 2026 से पूर्ण रूप से काम बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर होंगे।

​समय पर मानदेय न मिलने से बढ़ा आर्थिक संकट

​कर्मचारियों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि अप्रैल 2025 से उन्हें नियमित रूप से पारिश्रमिक नहीं मिल पा रहा है। वर्तमान स्थिति यह बन चुकी है कि जब तीन से चार महीने की लंबी अवधि बीत जाती है, तब जाकर कहीं केवल एक महीने का वेतन बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता है। इतना ही नहीं, मार्च 2026 से लेकर अब तक किसी भी आउटसोर्स कर्मचारी को एक भी रुपये का भुगतान नहीं किया गया है। पिछले कई महीनों से वेतन की एक-एक पाई के लिए तरस रहे इन कर्मचारियों के सामने अब अपने परिवार का भरण-पोषण करने का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। हालत इतनी बदतर हो चुकी है कि स्वास्थ्य केंद्रों तक ड्यूटी पर आने-जाने के लिए कर्मचारियों के पास बस का किराया और अपनी गाड़ियों में पेट्रोल डलवाने तक के पैसे नहीं बचे हैं। बच्चों की स्कूल फीस जमा करने और घर के जरूरी राशन का खर्च उठाना भी अब उनके लिए अत्यंत कठिन होता जा रहा है।

​ईपीएफ और ईएसआईसी के लाभ से वंचित रखने का आरोप

​कर्मचारी संघ ने आउटसोर्सिंग कंपनियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए प्रशासनिक अनियमितताओं के कई आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार वर्ष 2021 से मार्च 2025 तक विभाग में अपनी सेवाएं दे चुके कर्मचारियों को अब तक न तो नियुक्ति पत्र दिए गए हैं, न ही उनका बकाया एरियर और अनुभव प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया गया है। इसके अतिरिक्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान नियमानुसार मिलने वाले ईपीएफ तथा ईएसआईसी के वित्तीय लाभ भी कर्मचारियों के खातों में जमा नहीं किए गए हैं। जब भी पीड़ित कर्मचारियों द्वारा इन जिम्मेदार एजेंसियों से अपने कानूनी अधिकारों और पैसों के संबंध में जानकारी मांगी जाती है, तो वहां से कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है। एजेंसियां लगातार अपनी जवाबदेही से बच रही हैं, जिससे कर्मचारियों में असंतोष और ज्यादा बढ़ गया है।

​तीन दिन का अल्टीमेटम और काम बंद करने की चेतावनी

​जबलपुर जिले के विभिन्न शासकीय अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में इस समय लगभग 250 आउटसोर्स कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जो इस पूरी व्यवस्था से मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं। संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों से बेहद कड़े शब्दों में मांग की है कि 30 मई तक कम से कम तीन महीने का पुराना रुका हुआ वेतन अनिवार्य रूप से जारी किया जाए। कर्मचारियों ने स्पष्ट रूप से सचेत किया है कि यदि इस तय समय सीमा के भीतर उनकी जायज मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए भुगतान नहीं किया गया, तो 1 जून 2026 से जिले के सभी आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी सामूहिक रूप से हड़ताल पर चले जाएंगे। इस संभावित हड़ताल के कारण यदि जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों और प्रशासन की होगी।

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