जर्जर हो चुके थे दोनों क्रूज के इंजन
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार बरगी जलाशय की लहरों पर पर्यटकों को सैर कराने वाले दोनों क्रूज अपनी निर्धारित उम्र सीमा पार कर चुके थे। विभाग की अपनी रिपोर्ट ही इस बात की पुष्टि करती है कि मैकल सुता क्रूज पिछले 20 वर्षों से निरंतर सेवा में था, जबकि रेवा क्रूज भी करीब 19 साल पुराना हो चुका था। लंबे समय तक लगातार उपयोग होने के कारण इन दोनों जलयानों के इंजन अब जवाब दे चुके थे। पत्राचार में साफ लिखा था कि इंजनों की कार्यक्षमता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और ये किसी भी वक्त बीच पानी में बंद होकर बड़ा खतरा पैदा कर सकते हैं।
स्पेयर पार्ट्स का अभाव, अधूरी मरम्मत
तकनीकी विशेषज्ञों की जांच में यह तथ्य भी सामने आया था कि रेवा क्रूज को 14 जनवरी 2025 से ही संचालन से बाहर कर दिया गया था क्योंकि वह सुधारने लायक नहीं बची थी। उसके इंजन इतने पुराने थे कि अब बाजार में उनके स्पेयर पार्ट्स मिलना भी बंद हो गए थे। ऐसी स्थिति में इंजनों को बदलना ही एकमात्र विकल्प था। इसके बाद भी विभाग ने मैकल सुता क्रूज के संचालन में भारी लापरवाही बरती, जबकि उसकी स्थिति भी रेवा क्रूज जैसी ही दयनीय थी। प्रबंधक ने पूर्व में ही सचेत किया था कि मैकल सुता का एक इंजन पर्याप्त भार उठाने में सक्षम नहीं है, जिससे तेज हवाओं में इसे नियंत्रित करना नामुमकिन हो जाता था।
चेतावनी पत्रों को दबाकर बैठे रहे अफसर
मैकल सुता रिसोर्ट के प्रबंधक ने पत्र क्रमांक 45, 108 और 169 के जरिए जबलपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय को बार-बार स्थिति से अवगत कराया था। इन पत्रों में स्पष्ट चेतावनी दी गई थी कि इंजनों की मरम्मत अब संभव नहीं है और इन्हें तुरंत बदलना जरूरी है। हैरानी की बात यह है कि इन गंभीर चेतावनियों के बाद भी जबलपुर में बैठे उच्च अधिकारियों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि इस खतरे की जानकारी भोपाल स्थित मुख्यालय को दी गई थी या नहीं। इस खुलासे के बाद अब पर्यटन निगम के उन आला अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं जिन्होंने सब कुछ जानते हुए भी क्रूज को पानी में उतारने की अनुमति दी।
मासूम जिंदगियों पर भारी पड़ी विभागीय अनदेखी
बरगी का यह हादसा महज एक दुर्घटना नहीं बल्कि सरकारी तंत्र की अक्षम कार्यप्रणाली और लालच का परिणाम है। अधिक से अधिक राजस्व कमाने के चक्कर में सुरक्षा के मानकों को किनारे रख दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक मैकल सुता की हालत इतनी खराब थी कि अक्सर इसे किनारे तक लाने के लिए छोटी स्पीड बोट का सहारा लेना पड़ता था। यदि समय रहते प्रबंधक की रिपोर्ट पर गौर किया जाता और नए इंजन लगा दिए जाते, तो 13 बेगुनाह लोगों को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ती। अब मांग की जा रही है कि केवल चालक पर कार्रवाई करने के बजाय उन सफेदपोश अफसरों को भी घेरे में लिया जाए जिनकी लापरवाही ने हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया।
